Ghungroo (घुँघरू)
घुँघरू की मदहोश धुनें: शायरी संग्रह शायरी 1 तेरी चाल में वो जादू, कि हर कदम पर, बज उठते हैं मेरे दिल के सारे घुँघरू । शायरी 2 खामोशी में भी एक शोर है तेरा, जानां, जब भी बजते हैं तेरे पैरों के घुँघरू । शायरी 3 नाचती हैं अदाएं तेरी, जब भी तुम चलती हो, और हर ताल पर बजते हैं घुँघरू तेरे। शायरी 4 तेरी आहट से ही महक उठती है फिज़ा, और गूंजते हैं हवाओं में तेरे घुँघरू । शायरी 5 रात की तन्हाई में तेरी याद जब आती है, कानों में बजते हैं बस तेरे घुँघरू । शायरी 6 क्या ...