लकीरें: किस्मत और चाहत की अनकही दास्तान
शायरी 1
ज़िंदगी की हर लकीर में, तेरा नाम है छुपा,
हर मोड़ पर तेरी यादों का, एक पैगाम है छुपा।
शायरी 2
हाथों की लकीरें कहती हैं, किस्मत का है खेल सारा,
मगर हौसलों से बदली है, तकदीर का हर किनारा।
शायरी 3
जब भी देखा आसमां को, एक लकीर सी खिंची थी,
जैसे मेरे ख्वाबों की दुनिया, तुझसे ही जुड़ रही थी।
शायरी 4
तेरी यादों की लकीरें, दिल से मिटती नहीं,
ये वो निशान हैं जो, कभी गुम होती नहीं।
शायरी 5
प्यार की हर लकीर, तुझसे होकर गुज़रे,
मेरी हर साँस में, बस तू ही तू ठहरे।
शायरी 6
क्या खबर थी कि ये लकीर, इतनी गहरी होगी,
जो मिटाए से भी ना मिटे, ऐसी पहरी होगी।
शायरी 7
बदलती रही दुनिया, बदलता रहा ज़माना,
ना बदली मेरे हाथों की, तेरी चाहत की लकीर।
शायरी 8
दूर क्षितिज पर देखो, एक लकीर सी दिखती है,
जैसे उम्मीद की किरण, मुझसे आ मिलती है।
शायरी 9
किस्मत की लकीरों पर, एतबार किसको रहा,
जब खुद ही बदलनी हो, राहें तो क्यों डरते भला।
शायरी 10
हर सुबह एक नई लकीर, खींचती है जिंदगी,
हर शाम उसे मिटा कर, सो जाती है बंदगी।
शायरी 11
दीवारों पर खींची हुई, तेरी तस्वीर की लकीर,
आज भी आँखों में बसी है, बनकर मेरी तकदीर।
शायरी 12
तेरी यादों की लकीर, जो दिल में खींची है,
हर साँस के साथ, और गहरी होती जाती है।
शायरी 13
मोहब्बत की ये लकीर, इतनी पुरानी है,
जितनी मेरे दिल की धड़कन, ये कहानी है।
शायरी 14
हाथों की लकीरों में, क्या क्या नहीं लिखा,
बस एक तेरा साथ, जो कहीं भी ना दिखा।
शायरी 15
मिटा दी सारी लकीरें, जो जुदाई की थीं,
अब बस तेरी मोहब्बत की, एक ही लकीर बाकी है।
शायरी 16
जो लकीरें नहीं मिलतीं, वो भी मिल जाती हैं,
अगर सच्ची चाहत हो, तो दीवारें भी झुक जाती हैं।