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Rabb (रब्ब)

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रब्ब (Rabb) की इनायत: दिल छू लेने वाली शायरी

शायरी 1

जब से जाना है मैंने तेरा नाम ए Rabb (रब्ब),
हर मुश्किल में मिलता है मुझे आराम ए Rabb (रब्ब)

शायरी 2

तेरी रहमतों का शुमार कैसे करूँ, मेरे Rabb (रब्ब),
हर सांस में तेरा ही है इज़हार, मेरे Rabb (रब्ब)

शायरी 3

ये दुनिया है फानी, तू ही है ला-फ़ानी Rabb (रब्ब),
तेरी कुदरत है हर बात की निशानी Rabb (रब्ब)

शायरी 4

मेरे हर सवाल का जवाब है तू, मेरे Rabb (रब्ब),
मेरी हर इबादत का हिसाब है तू, मेरे Rabb (रब्ब)

शायरी 5

तुझसे ही शुरू, तुझपे ही खत्म है ये सफर, ऐ Rabb (रब्ब),
तुझ बिन हर चीज़ है बे-असर, ऐ Rabb (रब्ब)

शायरी 6

ज़िंदगी की हर उलझन में, तेरा नाम है सहारा Rabb (रब्ब),
तू ही है कश्ती का किनारा, तू ही है आसमां हमारा Rabb (रब्ब)

शायरी 7

तेरी मोहब्बत से रोशन है ये दिल, मेरे Rabb (रब्ब),
तू ही है मेरी मंज़िल, मेरे Rabb (रब्ब)

शायरी 8

हर ज़र्रे में तेरी ही निशानी है Rabb (रब्ब),
हर साँस में तेरी ही कहानी है Rabb (रब्ब)

शायरी 9

गुनाहों की गर्दिश में भी तू ही है मेरा मुहाफिज़ Rabb (रब्ब),
बख़्श दे खताएँ मेरी, ऐ कारसाज़ Rabb (रब्ब)

शायरी 10

तेरी दी हुई हर नेमत का शुक्र कैसे अदा करूँ, या Rabb (रब्ब),
हर पल तेरा ही फजल है मुझपर, या Rabb (रब्ब)

शायरी 11

रूह को सुकून मिलता है तेरे नाम से, मेरे Rabb (रब्ब),
हर गम मिट जाता है तेरे कलाम से, मेरे Rabb (रब्ब)

शायरी 12

अंधेरों में रोशनी है तेरी याद, ऐ Rabb (रब्ब),
तू ही है मेरी दुनिया, तू ही है मेरी फरियाद, ऐ Rabb (रब्ब)

शायरी 13

तेरी इनायत से खिलते हैं गुलशन, ऐ Rabb (रब्ब),
तेरी अता से मिलते हैं सुकून के दरशन, ऐ Rabb (रब्ब)

शायरी 14

जब कोई ना सुने, तब सुनता है तू मेरी, ऐ Rabb (रब्ब),
हर दुआ कबूल करता है तू मेरी, ऐ Rabb (रब्ब)

शायरी 15

तेरी मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता, या Rabb (रब्ब),
तेरे हुक्म के बिना कुछ भी नहीं मिलता, या Rabb (रब्ब)

शायरी 16

दिल की गहराइयों में बसी है तेरी याद, मेरे Rabb (रब्ब),
हर लम्हा है तेरी रहमत का फसाद, मेरे Rabb (रब्ब)

शायरी 17

तेरी हस्ती है हर जगह मौजूद, ऐ Rabb (रब्ब),
तेरी कुदरत का करिश्मा है हर वजूद, ऐ Rabb (रब्ब)

शायरी 18

हर इम्तिहान से पार लगा दे, मेरे Rabb (रब्ब),
अपनी रहमतों से मुझे नवाज़ दे, मेरे Rabb (रब्ब)

शायरी 19

जब आंखें बंद करूँ तो दिखे तू ही, ऐ Rabb (रब्ब),
हर ख्वाब में रहे बस तेरी ही जुस्तजू, ऐ Rabb (रब्ब)

शायरी 20

मेरी ज़बान पे तेरा ही नाम हो हमेशा, या Rabb (रब्ब),
मेरे हर अमल में तेरी रज़ा हो हमेशा, या Rabb (रब्ब)

शायरी 21

तू ही है दाता, तू ही है विधाता, मेरे Rabb (रब्ब),
तेरे दर पे सर झुकाता है हर आता, मेरे Rabb (रब्ब)

शायरी 22

मेरी तन्हाई का साथी है तू, ऐ Rabb (रब्ब),
मेरी हर खुशी की बाती है तू, ऐ Rabb (रब्ब)

शायरी 23

तू दे तो नेमत, तू ले तो इल्तिजा, ऐ Rabb (रब्ब),
हर हाल में है तेरी ही रज़ा, ऐ Rabb (रब्ब)

शायरी 24

मेरा वजूद क्या है, तेरी इनायत के सिवा, ऐ Rabb (रब्ब),
मेरा सुकून क्या है, तेरी हिदायत के सिवा, ऐ Rabb (रब्ब)

शायरी 25

तेरी रहमतों के साए में कट जाए मेरी उम्र, ऐ Rabb (रब्ब),
तेरी इबादत में ही गुज़र जाए मेरा हर पल, ऐ Rabb (रब्ब)

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