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Rooh (रूह)

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रूह की गहराइयों से निकलीं शायरीयाँ

तेरी यादों की खुशबू

तेरी यादों से महक जाती है हर शाम मेरी,
जैसे खुशबू से भर जाती हो रूह मेरी।

इश्क़ का गहरा दर्द

इश्क़ में दिल को ही नहीं, रूह को भी खोया है,
क्या बताऊँ कितना दर्द इस दिल ने सहला है।

नज़रों का जादू

जब से मिली है तुमसे मेरी नज़रें,
रूह भी कहने लगी है, तुम ही हो मेरे।

हर साँस में तेरा नाम

हर सांस में अब तेरा ही नाम है,
मेरी रूह में बसा तेरा ही मुकाम है।

जुदाई का दर्द

बिछड़ कर तुझसे ज़िंदा तो हूँ, मगर,
मेरी रूह भटकती है दर-ब-दर।

रूह का एहसास

कभी सोचना, क्या गुज़रती है रूह पर,
जब जिस्म से जुदा होती है वो किसी के शहर।

चाहत की शिद्दत

तेरी चाहत में इतनी शिद्दत है,
कि रूह को भी अब तेरी ही आदत है।

खामोश बातें

वो बातें जो लबों तक न आईं,
मेरी रूह ने चुपचाप सब सुन लीं।

दर्द में सुकून

दर्द में भी सुकून मिलता है,
जब रूह तेरी यादों में खो जाती है।

ख़्वाबों का आगाज़

ये कौन आ गया है मेरे ख़्वाबों में,
कि रूह भी मुस्कुराने लगी है।

धोखा अपनी रूह से

ज़माने भर से क्या शिकवा करना,
जब अपनी ही रूह ने धोका दिया हो।

तेरी खुशी, मेरी बंदगी

तेरी ख़ुशी में ही मेरी रूह की ख़ुशी है,
तू सलामत रहे, यही मेरी बंदगी है।

चाँद की बातें

आज फिर चाँद ने कुछ कहा रूह से,
कहता था, "क्या इतना तन्हा है तू मुझसे?"

रूह का नाम

ज़िंदगी की हर सुबह, हर शाम,
तेरी रूह के नाम।

पहचान भूल गई

क्या खबर थी कि इतना टूट जाएगा दिल,
कि रूह भी अपनी पहचान भूल जाएगी।

रूह का बहलना

मेरी रूह को कोई नहीं समझता,
ये तो बस तेरी बातों से बहलती है।

दीदार की जन्नत

तेरा दीदार हो जाए, तो क्या बात है,
मेरी रूह को मिल जाए जन्नत सी राहत है।

रूह की ज़ुबाँ

ज़ुबां खामोश है, पर रूह बोलती है,
तेरी यादों में हर पल पिघलती है।

जिस्मों की दूरियाँ

ये दूरियां तो बस जिस्मों की हैं,
हमारी रूह तो आज भी एक है।

रूह का वादा

रूह का रिश्ता है तुझसे मेरा,
जो कभी ना टूटेगा, वादा है मेरा।

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