आस: उम्मीदों के पर
शायरी #1
मेरी आँखों में तेरी आस बाकी है,
ये दिल कहता है तू मेरे पास बाकी है।
शायरी #2
हर टूटे दिल की एक आस होती है,
कि कोई तो समझे जो बात ख़ास होती है।
शायरी #3
जुदाई की घड़ी में भी एक आस रहती है,
कि लौट आओगे, ये साँस कहती है।
शायरी #4
उम्मीदों की राहों में, बस एक आस है,
कि मंजिल मिलेगी, ये एहसास है।
शायरी #5
तेरी यादों से लिपटी हर एक आस,
करती है दिल को हर पल उदास।
शायरी #6
अंधेरी रात में जुगनू सी आस,
कभी बुझती नहीं ये, है बहुत ख़ास।
शायरी #7
हर कदम पर नई आस जगाता हूँ,
गिरकर फिर से संभल पाता हूँ।
शायरी #8
जब सब छूट जाए, तब भी एक आस रहे,
कोई तो है, जो मेरे पास रहे।
शायरी #9
टूटे दिल में भी जीने की आस है,
कुछ अनकही बातों का एहसास है।
शायरी #10
तेरी एक झलक की आस में,
कट जाती हैं रातें, तेरे इंतज़ार में।
शायरी #11
धूप में भी दिल को एक आस है,
बादलों में छिपा कोई एहसास है।
शायरी #12
जिंदगी की दौड़ में, एक ही आस है,
कि कोई तो अपना, मेरे पास है।
शायरी #13
सूखी शाखों में भी खिलने की आस है,
मौसम बदलेगा, ये एक विश्वास है।
शायरी #14
चाहे कितनी भी मुश्किल हो डगर,
दिल में रहती है मंजिल की आस अमर।
शायरी #15
बिखर जाएं ख्वाब, पर आस न टूटे,
सवेरा होगा, ये भरोसा न छूटे।
शायरी #16
तेरी राहों में मेरी आस बिछी है,
हर पल तेरी याद दिल में बसी है।
शायरी #17
रात की खामोशी में भी एक आस है,
चाँदनी की ओट में कोई ख़ास है।
शायरी #18
पतझड़ के बाद भी फूलों की आस,
जीवन का यही तो है सुन्दर एहसास।