Alam (आलम)

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आलम-ए-दिल: एक दुनिया शायरी की

1. दिल का आलम

तेरी यादों में मेरा हर पल यूँ गुज़रा है,
जैसे इस दुनिया का हर आलम निखरा है।

2. हिज्र का मंज़र

हिज्र में ऐसा है कुछ इस दिल का आलम,
जैसे उजड़ गया हो कोई गुलों का मौसम।

3. नज़रों का फरेब

क्या बताएं तुम्हें इन नज़रों का आलम,
हर चेहरा लगता है बस तुम्हारा ही हमदम।

4. रात का सन्नाटा

तन्हाई की रातों में ये कैसा है आलम,
हर बात पे आती है बस तेरी याद हरदम।

5. महफ़िल का रंग

तुम जो आओ तो बदल जाए महफ़िल का आलम,
रौशनी फैल जाए और दूर हो हर ग़म।

6. सुबह का मंज़र

सुबह की पहली किरण में भी है तेरा ही आलम,
हर सू बिखर गई जैसे तेरी मोहब्बत का परचम।

7. इश्क की आग

इश्क की आग में जलते दिल का ये आलम,
राख हो गई हसरतें और बुझ गया हर ग़म।

8. खुशियों की बरसात

तेरी आमद से बदल गया खुशियों का आलम,
हर तरफ मुस्कुराते फूल और बहता तरन्नुम।

9. खामोशी का शोर

खामोशियाँ भी शोर करती हैं, ये कैसा आलम है,
बिन कहे ही बातों का सिलसिला चलता हरदम है।

10. बेबसी का मंज़र

बेबसी का ये कैसा अजीब आलम है,
न कह पाते हैं कुछ, न रह पाते हैं हम।

11. तेरे आने से

जब से तुम आए हो, बदल गया मेरा आलम,
हर दर्द भूल गया, हर ख़ामोशी में सुकून।

12. यादों का डेरा

यादों का है कुछ ऐसा ही अनोखा आलम,
ज़िंदगी के हर मोड़ पर मिलता है ये हमदम।

13. चाँदनी रात

ये चाँदनी रात, ये तारों का आलम,
क्या खूब है मोहब्बत का ये खूबसूरत मौसम।

14. तन्हा सफ़र

तन्हा सफर में भी दिल का अजीब आलम है,
हर कदम पर तेरी याद, हर लम्हा तेरा ग़म है।

15. आँखों का जादू

तेरी आँखों का है ऐसा ही कोई आलम,
इनमें खोकर ही दिल को मिलता है सुकून।

16. वफ़ा की राह

वफ़ा की राह में दिल का अजीब आलम है,
हर कदम पे इम्तिहान और हर घड़ी कोई ग़म है।

17. यादों की धूप

तेरी यादों की धूप में भीगा मेरा आलम,
हर बूंद में है तेरा ही प्यार, तेरा ही मरहम।

18. जुदाई का गम

जुदाई के बाद भी दिल का कैसा आलम,
जैसे सूना हो गया हो कोई प्यारा गुलशन।

19. खुशबू-ए-वतन

वतन की खुशबू में भी है एक अलग सा आलम,
मिट्टी की हर कण में है प्यार और मरहम।

20. मौसम-ए-बहार

मौसम-ए-बहार में भी है दिल का अजीब आलम,
फूल खिलते हैं, पर दिल में रहती है कोई कम।

21. ख्वाबों की दुनिया

ख्वाबों की दुनिया का है एक निराला आलम,
हर रात सजते हैं पल, हर सुबह होते हैं गुम।

22. तेरा इंतज़ार

तेरे इंतज़ार में आँखों का ये कैसा आलम,
पलकें बिछाए बैठी हैं, दिल में है हरदम।

23. दुनिया का शोर

इस दुनिया के शोर में भी है एक सुकून का आलम,
जब तेरी यादों में खोकर, भूल जाते हैं हम।

24. महबूब की गली

महबूब की गली में होता है वो कैसा आलम,
हर राह है फूलों से सजी, हर कदम है पुरनम।

25. दिल की किताब

दिल की हर किताब में लिखा है तेरा आलम,
हर पन्ना कहता है तेरी बातों का नग़मा।