आरज़ू (Arzoo): ख्वाहिशों के रंगीन पर
आरज़ू-ए-दिल
दिल में इक अजीब सी आरज़ू जगी है आज,
शायद कोई पुराना ख्वाब फिर से जगा है आज।
तेरी झलक की आरज़ू
तेरी एक झलक की आरज़ू लिए बैठे हैं हम,
हर साँस में बस तेरा ही नाम लिए बैठे हैं हम।
नई आरज़ू हर मोड़ पर
हर मोड़ पे ज़िंदगी की एक नई आरज़ू मिली,
कभी पूरी हुई, कभी अधूरी ही रह गई।
रुलाने वाली आरज़ू
क्या खबर थी कि ये आरज़ू रुलाएगी इतना,
हम तो चले थे इसे ज़िंदगी बनाने को।
सर्द रातों की आरज़ू
सर्द रातों में तेरी यादों की आरज़ू रहती है,
गरम चाय की प्याली संग दिल बहलती है।
खामोशी समझने की आरज़ू
कभी कभी तो बस इतनी सी आरज़ू होती है,
कोई समझे खामोशी, कोई साथ हो मेरे।
मुश्किल आरज़ू
बड़ी मुश्किल से दिल ने पाली थी ये आरज़ू,
इक दिन तुम आओगे, पूरा होगा मेरा हर ख्वाब।
टूटती आरज़ू
मिट्टी के खिलौनों सी ये आरज़ू टूट जाती है,
जब हकीकत से टकराकर ज़िंदगी रूठ जाती है।
ख्वाबों में आरज़ू
ख्वाबों में भी अब वही आरज़ू पलने लगी है,
जो हकीकत में कभी मुमकिन नहीं हो पाई।
खुशी की आरज़ू
बस इतनी सी आरज़ू है कि खुश रहे वो,
जिसकी खातिर हमने हर खुशी छोड़ दी।
नई आरज़ू का ख्वाब
ज़िंदगी ने दिए हैं ज़ख्म कई बेहिसाब,
फिर भी इक नई आरज़ू का है ख्वाब।
महबूब की आरज़ू
उस महबूब की हर बात में एक आरज़ू छिपी है,
जो कभी लबों पे आती नहीं, बस निगाहों में रहती है।
चाँद से आरज़ू
रात भर चाँद से तेरी बातें करता रहा,
सुबह होते ही तेरी आरज़ू में फिर से जागता रहा।
हर पत्ती में आरज़ू
हर पत्ती में, हर फूल में, तेरी आरज़ू दिखे,
तू जहाँ भी रहे, बस खुशियों से महके।
कभी खत्म न होने वाली आरज़ू
क्या खूब है ये आरज़ू, जो कभी खत्म नहीं होती,
ज़िंदगी के हर पल में एक नई कहानी बुनती है।
आरज़ू की आग
कभी बुझती नहीं दिल की ये आरज़ू की आग,
तू चाहे जितना भी बुझा, जलती रहती है ये आग।
खामोश आरज़ू
कोई तो हो जो समझे मेरी ये खामोश आरज़ू,
बिन कहे जो पढ़ ले मेरी हर एक बात।
करीब की आरज़ू
ये कैसी आरज़ू है, जो मिटती नहीं कभी,
तू दूर भी हो, तो भी लगती है करीब।
इंतज़ार की आरज़ू
तेरे इंतज़ार में हर पल गुज़ारा है हमने,
बस तेरी एक झलक की आरज़ू में जीते हैं।
यादों की आरज़ू
हर लम्हा तेरी यादों में डूबा रहता है,
दिल में बस तेरी आरज़ू ही रहती है।