चैन के पल: दिल को छू जाने वाली शायरी
शायरी 1
तेरी यादों से ही मिलता है मेरे दिल को चैन,
वरना इस बेकरार दुनिया में, और कहाँ है सुकून।
शायरी 2
जब से देखा है तुम्हें, खो गया मेरा चैन,
हर घड़ी बस तुम ही तुम, अब तो दिन-रैन।
शायरी 3
नींदें उड़ गईं, ख्वाबों से भी रुसवाई हुई,
जब से तुमसे मोहब्बत हुई, सारा चैन खो गया।
शायरी 4
कहाँ ढूँढू मैं अब वो पुराने दिन का चैन,
जब तेरी बातों से दिल को मिलता था सुकून।
शायरी 5
पल भर को भी कहाँ मिलता है अब चैन,
जब से तेरी जुदाई का ग़म बसा है इन आँखों में।
शायरी 6
वो कहते हैं दिल लगाकर मिलेगा चैन,
हमें तो दिल लगाकर ही मिली है बेचैनी।
शायरी 7
तेरी बाहों में ही आकर मिलती है साँसों को चैन,
वरना इस दुनिया में तो बस भाग-दौड़ है।
शायरी 8
जो तुम नहीं तो ये दुनिया है वीरान सी,
तुम्हारे बिना कहाँ है मेरे दिल को चैन।
शायरी 9
तन्हाई में अब कैसे कटेगी ये रात,
जब से तुम गए, खो गया सारा चैन।
शायरी 10
बेताब दिल को अब कैसे मिले करार,
तेरे बिना तो सारा जहाँ है बेचैन।
शायरी 11
एक पल भी नहीं कटता तुम्हारे बगैर,
जाने कहाँ गया मेरे दिल का चैन।
शायरी 12
रात भर जागता रहा तेरी यादों में,
क्या पता कब मिलेगा इस दिल को चैन।
शायरी 13
तेरी मुस्कान में ही है मेरी जिंदगी का चैन,
गर तू रूठ जाए तो हर पल है बेचैनी।
शायरी 14
दिल को आराम कहाँ, जब तुम पास नहीं,
तुम्हारे बगैर तो ये रूह भी बेचैन है।
शायरी 15
सारे जहाँ का सुख एक तरफ,
तेरी गोद में मिलता है मुझे सच्चा चैन।
शायरी 16
जब तक साँस है, तेरी याद है,
उसके बिना कहाँ मिलता है चैन।
शायरी 17
दिल की धड़कनों में बस तेरा ही नाम है,
तेरी वजह से ही मिलता है दिल को चैन।
शायरी 18
बेचैनी जब हद से गुज़र जाती है,
तेरी तस्वीर देख कर मिलता है चैन।
शायरी 19
ये दुनिया है मतलबी, ये लोग हैं बेईमान,
सच्चा चैन तो मिलता है खुद के दामन में।
शायरी 20
अब तो आदत सी हो गई है इस बेचैनी की,
क्या पता चैन आए भी तो कैसा लगेगा।
शायरी 21
तेरी यादों के दरिया में डूब कर भी,
कहाँ मिलता है इस दिल को चैन।
शायरी 22
जब तक न देखूँ मैं तेरा हसीन चेहरा,
तब तक मेरे दिल को नहीं मिलता चैन।