Ghaur (ग़ौर)

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ग़ौर: गहरे ख़्यालों की एक दुनिया

शायरी 1

ज़िंदगी के हर मोड़ पर किया हमने ग़ौर,
कुछ बातें समझ आएँ, कुछ रह गईं अनकही।

शायरी 2

तेरी हर बात पर किया है हमने ग़ौर,
यूँही नहीं दिल ये बेताब हुआ।

शायरी 3

कुछ तो है जो करता हूँ मैं ग़ौर बार-बार,
शायद ये दिल की बात है, या तेरा इंतज़ार।

शायरी 4

उनकी खामोशी पर भी किया है मैंने ग़ौर,
हर अदा में एक नई बात नज़र आई।

शायरी 5

कब तक न करोगे तुम हमारी बातों पर ग़ौर,
इक दिन तो ये दिल भी बेज़ार हो जाएगा।

शायरी 6

जो कह दिया वो सच था, किया था मैंने ग़ौर,
कुछ और सुनना है, तो फिर से सुन लो तुम।

शायरी 7

ख़ामोशी में भी कितना शोर छुपा था, किया ग़ौर,
जब से तुमने कहा कि हम तुम्हारे हैं।

शायरी 8

दुनिया की रीत पर न करो इतना ग़ौर,
अपना रास्ता बनाओ और आगे बढ़ो तुम।

शायरी 9

हर बात को दिल से लगाया है हमने, किया ग़ौर,
तुमने समझा नहीं, ये हमारी थी भूल।

शायरी 10

जो बात तुमने छिपाई थी, उस पर किया ग़ौर,
आज भी वो दिल में एक राज़ बनी है।

शायरी 11

हवाओं में भी उनकी खुशबू है, करो तुम ग़ौर,
हर साँस में अब वो ही समाए हैं।

शायरी 12

कभी बैठ के करना अपने आप पर ग़ौर,
कितनी बातें हैं जो खुद से कही नहीं।

शायरी 13

हमने तो हर अदा पे उनकी किया है ग़ौर,
अब तुम बताओ कि दिल को कैसे बहलाएँ।

शायरी 14

कुछ देर ठहर कर ज़रा इन राहों पर ग़ौर करो,
मंज़िलें खुद ब खुद मिल जाएंगी तुम्हें।

शायरी 15

अगर करते तुम हमारी वफ़ा पर थोड़ा ग़ौर,
तो शायद ये दूरियाँ कभी होती ही नहीं।

शायरी 16

हर लफ्ज़ में था एक गहरा राज़, किया ग़ौर तो जाना,
इश्क की दुनिया में हर बात अजब होती है।

शायरी 17

रात की तन्हाई में अक्सर करता हूँ मैं ग़ौर,
सितारों में आज भी तेरा अक्स ढूंढता हूँ।

शायरी 18

उनके जाने के बाद, किया जो हमने ग़ौर,
हर खुशी ने दामन छुड़ा लिया हमसे।

शायरी 19

रिश्तों की गहराई पर कभी तो करो ग़ौर,
कुछ धागे बड़े नाजुक होते हैं, टूट जाते हैं।

शायरी 20

कभी न कभी तो वो भी करेंगे हम पर ग़ौर,
इंतज़ार की हदें कब तक तोड़ेंगे वो।

शायरी 21

उनकी आँखों में देखा तो किया बहुत ग़ौर,
मोहब्बत के सिवा कुछ और न था उनमें।

शायरी 22

जो बात

Ghaur (ग़ौर) Ghaur (ग़ौर) Reviewed by Editor on अक्टूबर 06, 2026 Rating: 5

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