जज़्बात (Jazbaat) पर दिलकश शायरी
दिल के गहरे राज़, जुबाँ पर आते नहीं,
यूँ तो बहुत कुछ है कहने को, पर जज़्बात दिखते नहीं।
खामोशी भी कभी-कभी बहुत कुछ कहती है,
बस सुनने वाला चाहिए, जो जज़्बात समझता है।
आँखों की नमी में छुपे हैं अनकहे किस्से,
हर अश्क में तैरते हैं मेरे जज़्बात अधूरे।
मोहब्बत हो या नफरत, दोनों ही बेमिसाल हैं,
छिपाए नहीं छिपते ये गहरे जज़्बात प्यारे।
रूह से रूह का रिश्ता, यूँ ही नहीं बनता,
इसके पीछे छुपे हैं सच्चे जज़्बात हमारे।
कुछ बातें अनकही ही अच्छी लगती हैं,
क्योंकि लफ्ज़ों में सिमटते नहीं हर जज़्बात।
लिखने बैठूं तो स्याही कम पड़ जाती है,
इतने गहरे हैं मेरे दिल के ये जज़्बात।
कभी खुशी, कभी गम, यही तो है ज़िन्दगी,
और हर पल में शामिल हैं ये जज़्बात ज़िन्दादिली।
तेरी यादों का समंदर, आँखों में उतर आया,
छलक पड़े आज फिर मेरे सारे जज़्बात।
हर मुस्कुराहट के पीछे, कोई राज़ गहरा है,
हर आँसू में छुपा है कोई ना कोई जज़्बात।
दिल की किताब के पन्ने पलटता रहा मैं,
मिलते गए हर पन्ने पर तेरे जज़्बात।
इकरार भी तुम हो, इंकार भी तुम ही हो,
मेरी हर धड़कन में बसते हैं तेरे जज़्बात।
कहाँ तक छुपाऊं अपने दिल की ये बात,
आँखों से बयां हो गए मेरे सारे जज़्बात।
हवाओं में घुल गई है तेरी खुशबू,
आज भी मेरे सीने में धड़कते हैं तेरे जज़्बात।
जो लफ्ज़ों में बयां ना हो सके वो एहसास हो तुम,
मेरे रूह में बसे सबसे प्यारे जज़्बात हो तुम।
वक्त के साथ बदल जाते हैं लोग अक्सर,
मगर नहीं बदलते सच्चे दिल के जज़्बात।
तारों भरी रात में, चाँदनी सी तुम हो,
मेरे हर ख्वाब में बसे, प्यारे जज़्बात हो तुम।
टूट कर बिखर जाते हैं अक्सर वो रिश्ते,
जिनमें कमी होती है सच्चे जज़्बात की।
ये दिल भी क्या चीज़ है, अक्सर बहक जाता है,
जब सामने आते हैं कोई पुराने जज़्बात।
तेरे बिना जीना भी एक सज़ा सा लगता है,
कैसे रोकूं मैं अपने इन बेचैन जज़्बात को।
हर पल, हर लम्हा, बस तेरी ही याद सताए,
कैसे समझाऊं मैं अपने इन दिल के जज़्बात।
रिश्तों की बुनियाद होती है एतबार पे,
और एतबार बना होता है सच्चे जज़्बात पे।
कभी-कभी खामोशी ही जवाब बन जाती है,
जब लफ्ज़ों में कैद नहीं होते गहरे जज़्बात।
ये दूरियाँ भले ही बढ़ा दें फासले,
मगर दिल के जज़्बात कभी कम नहीं होते।
एक तेरा ही नाम है, जो धड़कता है सीने में,
एक तेरे ही लिए हैं ये सारे जज़्बात मेरे।
सुना है, दर्द अक्सर शायर बना देता है,
हाँ, मेरे भी जज़्बात ही कलम को चलाते हैं।
दिल की गहराइयों में छुपा है एक खज़ाना,
अनमोल मोतियों जैसे मेरे ये जज़्बात पुराने।
काश कोई पढ़ पाता मेरी आँखों की ज़ुबान,
समझा पाता उन अनकहे मेरे हर जज़्बात को।