निशान (Nishan): यादों के गहरे रंग
दिल पे जो तूने छोड़ा है, वो कैसा निशान है,
हर साँस में बसता है, यही मेरी पहचान है।
गुज़रे लम्हों की यादें, अक्सर छोड़ जाती हैं,
दिल की दीवारों पर, गहरे निशान बनाती हैं।
वफ़ा की राहों में, कदम बढ़ाए थे हमने,
प्यार की मंज़िल तक, रह गए कुछ निशान सँग में।
ज़िंदगी की किताब में, कितने ही पन्ने मोड़ दिए,
हर मोड़ पर एक नया, गहरा निशान छोड़ दिए।
आँसुओं की बारिश में, धोए नहीं जाते ये,
रुह पे बनते जो गहरे, इश्क़ के निशान हैं ये।
भूल जाने की कोशिश में, और उभर आते हैं,
तेरी यादों के प्यारे, अनमोल निशान हैं ये।
मोहब्बत की आग में, जल के खाक हुए हम,
राख में भी देखे तो, तेरे ही निशान थे हम।
वक्त की रेत पर, क्या ही ठहरते ये कदम,
तेरे प्यार की खुशबू, बस है एक निशान हरदम।
ख्वाबों में भी आते हो, हकीकत में भी तुम,
हर जगह छोड़ जाते हो, अपने निशान गुमसुम।
टूटे दिल के हर टुकड़े पर, तेरा नाम लिखा है,
मिटा न पाया कोई, ये कैसा निशान है।
दूरियों के फासले, कम नहीं होते कभी,
दिल पर रह जाते हैं, कुछ ऐसे निशान सभी।
राह-ए-इश्क़ में जो हम, ठोकरें खाते रहे,
गिरते-उठते हर पल, बनते गए नए निशान।
चाँद की रोशनी में, धुंधले से दिखते हैं,
तेरी यादों के निशान, जो दिल में टिकते हैं।
पत्थरों पे पानी से, बनते नहीं कोई निशान,
दिल पे पत्थर से लगते हैं, वो होते गहरे निशान।
एक मुलाकात का पल, बन गया सारी उम्र,
छोड़ गया दिल पर एक, गहरा और मीठा निशान।
सावन की बारिश में, मिट्टी धुल जाती है,
पर दिल के ज़ख्मों का, कहाँ कोई निशान मिटाती है।
उंगलियों की पोरों पर, अब भी महसूस होता है,
तेरे लम्स का वो गहरा, रूहानी निशान होता है।
सर्द हवाओं में, जब तेरा नाम लेता हूँ,
लवों पर रह जाता है, एक अनमोल निशान।
ये कैसी दोस्ती है, ये कैसा रिश्ता है,
एक पल की जुदाई भी, छोड़ जाती है गहरा निशान।
हर हँसी के पीछे, छिपे कई राज़ हैं,
आँखों में कैद हैं, अनकहे निशान हैं।
खुदा की कसम, हमने तुम्हें भुलाने की कोशिश की,
पर हर कोशिश ने छोड़ा, एक नया निशान दिल पे।
तेरी बातों के असर से, दिल पे बन गए नक्श,
कोई मिटा न पाया, ऐसे हैं ये निशान।
गुज़रते लम्हों ने, बहुत कुछ बदल दिया,
पर तेरी मोहब्बत के, निशान वही रहे सदा।
ज़माने की गर्दिशें, क्या बदलेंगी हमें,
जब दिल पे हैं गहरे, तेरे प्यार के निशान।
कभी न मिटने वाली, ये तेरी अदा है,
हर मुलाकात छोड़ जाती है, एक प्यारा निशान।
जब भी आइना देखता हूँ, तुम दिखते हो,
मेरी रूह पर तेरे, गहरे निशान दिखते हैं।
वो जो छोड़ गए थे तुम, बेवफ़ाई की आहट में,
दिल पे रह गया है उसका, आज भी गहरा निशान।
आँधियों से कह दो, मेरा घर न उजाड़ें,
दीवारों पर लिखे हैं, तेरे नाम के निशान।
हथेली की लकीरों में, तेरी किस्मत कहाँ,
पर दिल पे है तेरा, बेमिसाल निशान।
हर जुदाई में, एक नया सबक सिखा,
और छोड़ गई दिल पर, एक गहरा निशान।