वैरागी मन की गूंज: 30+ हृदयस्पर्शी शायरी
विरक्ति की राह
दुनिया की मोह माया से, जब मन मेरा अघाया,
तब जाके कहीं मेरे भीतर, एक वैरागी भाव समाया।
खामोश सफर
न दौलत की चाहत, न शोहरत का जुनून है,
एक वैरागी का जीवन तो, बस एक सुकून है।
मुक्ति का पाठ
रिश्तों की डोर से, खुद को आजाद कर लिया,
मैंने तो अपने जीवन को, एक वैरागी जैसा संवार लिया।
साधना की आग
जला दी सारी ख्वाहिशें, भीतर साधना की आग में,
अब कहाँ कोई दुनियादारी, मेरे इस वैरागी दिमाग में।
निर्भय पथ
काँटों भरा पथ भी अब, लगता है फूलों की सेज,
जब से हृदय में बस गया है, एक वैरागी का तेज।
ईश्वर से मिलन
मैं नहीं हूँ दुनिया का, मैं तो ईश्वर का दास हूँ,
एक वैरागी हूँ मैं, जिसकी हर साँस में विश्वास हूँ।
बंधन से परे
बंधनों से मुक्त होकर, उड़ चला हूँ गगन में,
वैरागी मन रम गया है, प्रभु के सुमिरन में।
शांति की खोज
जहाँ शांति मिले मन को, वही मेरा बसेरा है,
एक वैरागी के लिए, बस यही जीवन मेरा है।
उदासीनता का रंग
रंगों की दुनिया से, अब मन मेरा उदासीन है,
क्यूंकि एक वैरागी के लिए, हर पल आनंदमय है।
सत्य की प्यास
सत्य की राह पर चला, छोड़ सारे असत्य को,
वैरागी बन कर जान लिया है, जीवन के मूल्य को।
आत्म-बोध
अपने ही अंदर पाया, मैंने आत्म-बोध का धाम,
वैरागी होकर जपता हूँ, बस प्रभु का नाम।
त्याग की गाथा
जग की सारी माया को, मैंने एक पल में त्याग दिया,
वैरागी बन कर मैंने, मोक्ष का मार्ग पा लिया।
संतोष का धन
संतोष ही मेरा धन है, न कोई और आस है,
एक वैरागी के जीवन में, बस यही एहसास है।
फकीरी का आलम
ये फकीरी का आलम है, ये सादगी का साया,
खुश है मेरा वैरागी मन, जिसने सब कुछ गँवाया।
मोह से मुक्ति
मोह-माया के जाल से, खुद को मैंने छुड़ाया,
बनकर एक सच्चा वैरागी, मैंने नया जीवन पाया।
प्रभु की राह
कोई मंजिल नहीं अब, बस प्रभु की राह है,
मेरे इस वैरागी मन को, बस यही एक चाह है।
दुनिया से बेखबर
दुनिया की भीड़ में भी, रहता हूँ मैं बेखबर,
ऐसा है मेरा जीवन, एक सच्चे वैरागी का सफर।
सूक्ष्म जीवन
सूक्ष्म सा जीवन है मेरा, सूक्ष्म सी मेरी सोच है,
एक वैरागी हूँ मैं, जिसकी हर सांस में मोक्ष है।
आसक्ति से दूरी
किसी से न आसक्ति, न किसी से वैर है,
वैरागी मन मेरा, बस प्रभु की शरण में है।
प्रेम का सागर
दुनिया में प्रेम फैलाया, नफरत को दिया त्याग,
यह तो है एक वैरागी का, निर्मल और पावन राग।
माया का जाल
माया का जाल तोड़ने को, मैंने जीवन ये अपना दिया,
वैरागी बनकर मैंने, खुद को ही पहचान लिया।
कर्मों का फल
कर्मों का फल जानता हूँ, कोई चिंता नहीं रही,
वैरागी बन मैं जीता हूँ, बस यही सच्चाई कही।
निर्लिप्त भाव
हर सुख-दुख में सम रहता, न कोई लालसा रही,
निर्लिप्त भाव से जीता, वैरागी की ये बात कही।
असीम शांति
असीम शांति है मन में, न कोई शोर शराबा है,
एक वैरागी के जीवन का, ये ही सच्चा तकाजा है।
जग से न्यारा
जग से न्यारा है जीवन, न किसी से जुड़ा हूँ मैं,
अपने ही ध्यान में मग्न, ऐसा वैरागी बना हूँ मैं।
सच्ची पहचान
न नाम की पहचान, न किसी मुकाम की चाह,
वैरागी की तो बस, एक सच्ची प्रभु की राह।
विरक्ति का भाव
जब मन में आया विरक्ति का भाव गहरा,
तब जाके मिला मुझे, वैरागी जीवन का सुनहरा सवेरा।
मुक्ति का द्वार
सारे द्वारों को छोड़कर, मुक्ति का द्वार मैंने पाया,
वैरागी बन कर मैंने, अपना जीवन चमकाया।
ज्ञान का प्रकाश
अज्ञान के अँधेरे को, ज्ञान से मैंने जलाया,
एक वैरागी के रूप में, मैंने प्रकाश फैलाया।
जीवन का सार
जीवन का सार समझा, मृत्यु का भय नहीं रहा,
वैरागी होकर मैंने, हर सत्य को सहा।