यक़ीन (Yakeen) - विश्वास की गहरी भावना
शायरी 1:
तेरी बातों पर मेरा है, हरदम सच्चा यक़ीन,
तू जो भी कहे, लगे जैसे खुदा का है कोई हसीन।
शायरी 2:
टूट गए थे सपने कई, जब ज़माने ने ठुकराया था,
फिर जागा खुद पर मेरा, एक नया यक़ीन, जब मैंने खुद को पाया था।
शायरी 3:
मौसम बदले, रिश्ते बदले, बदल गए कई रंग,
पर मेरी दुआओं में तेरा, यक़ीन है, रहेगा हमेशा संग।
शायरी 4:
किस्मत पर नहीं, अपनी मेहनत पर है मेरा विश्वास,
एक दिन तो हासिल होगी मंज़िल, ये गहरा है मेरा यक़ीन खास।
शायरी 5:
तू दूर है सही, पर तेरी यादें हैं करीब,
मिलेंगे फिर कभी, है ये मेरा सच्चा यक़ीन, ऐ मेरे हबीब।
शायरी 6:
जब डूब रहा था मन, अंधेरों की गहराइयों में,
एक रौशनी जगाई, तेरे प्यार ने, मेरे यक़ीन की परछाइयों में।
शायरी 7:
रिश्तों की डोर बड़ी नाज़ुक होती है, ऐ दोस्त,
इसे बांधे रखने को चाहिए, एक अटूट यक़ीन, जो न हो कभी पस्त।
शायरी 8:
ख्वाबों को हकीकत बनाना है तो, खुद पर कर यक़ीन,
खुदा भी तेरी मदद करेगा, जब इरादा होगा तेरा रंगीन।