Baatil (बातिल)

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बातिल (Baatil): असत्य की परछाई में ढले हुए बोल

1. सच की चमक

अंधेरों में छिपकर रहता है, सच से दूर भागता है,
हर पल यह बातिल अपना, एक नया मुखौटा साधता है।

2. फरेब का जाल

कब तक चलेगा तेरा ये, फरेब का जाल, ऐ दुनिया,
एक दिन तो मिटना है तुझको, ओ बातिल की गलिया।

3. हकीकत की राह

हकीकत की राह में, यह बातिल भी आखिर झुक जाएगा,
कितनी भी कर ले साजिशें, सच का परचम लहराएगा।

4. भ्रम का साया

भ्रम के साये में जो जिया, वह खुद को ही धोखे में रखता है,
यह बातिल का पर्दा, सच को कहाँ तक ढक सकता है।

5. मिटने को बेताब

है नहीं ताकत उसमें जो, सदा कायम रह पाएगा,
यह बातिल का साया है, एक दिन खुद ही मिट जाएगा।

6. झूठी शान

कितनी भी कर ले झूठी शान, दिखावा ऐ बातिल,
मिटेगा तेरा वजूद, न रहेगा तेरा कोई साहिल।

7. पहचान खोने का डर

डरता है तू अपनी पहचान खोने से, ऐ बातिल,
पर सच की रोशनी में, कहाँ टिक पाएगा तेरा हासिल।

8. असत्य का साम्राज्य

कितने भी बना ले तू, असत्य के ऊँचे महल,
एक चिंगारी सच की, ध्वस्त कर देगी ये बातिल।

9. सत्य की पुकार

तेरी हर कोशिश नाकाम है, ए बातिल के पुजारी,
सच की पुकार गूँजेगी, और टूटेगी तेरी हर बीमारी।

10. धोखे की दुनिया

ये दुनिया है धोखे की, जहाँ बातिल का ही राज चलता है,
पर रोशनी सच की जब आती, हर पर्दा फिर पिघलता है।

11. असत्य का भ्रम

जो करते हैं भ्रम पैदा, वह बातिल के ही निशान हैं,
मिट जाएँगे सारे फरेब, जब खुलेंगे दिलों के कान हैं।

12. खालीपन की दास्तां

है खालीपन की दास्तां, यह बातिल का हर अफसाना,
सच की एक धुन जब बजे, मिट जाएगा हर बहाना।

13. रोशनी की तलब

तलव हो जिसे रोशनी की, वह बातिल से क्या डरेगा,
सच की राह पर चलने वाला, कभी न राह भटकेगा।

14. झूठे वादे

कितने भी कर ले झूठे वादे, ऐ बातिल की ज़ुबान,
वक्त आने पर खुल जाएगी, तेरी हर पोल और हर पहचान।

15. वजूद की जंग

वजूद की जंग में, बातिल को शिकस्त देनी है,
हमें सच की मशाल लेकर, हर अँधेरा रौशन करनी है।

16. क्षणभंगुर अस्तित्व

तेरा अस्तित्व क्षणभंगुर है, ऐ बातिल की फितरत,
सच की लौ जलाकर ही, मिलेगी मन को राहत।