मयकदा: रूह की राहत, दिल की आवाज़ (Maikada: Soul's Comfort, Heart's Voice)
शायरी 1
मयखाने की हर शाम कुछ कहती है,
हर दिल की कहानी यहाँ बहती है।
जहाँ गमों को भूलने का हुनर मिलता है,
उस जगह को हम मैकदा कहते हैं।
शायरी 2
तेरी यादों से भीगी हर रात है,
मैकदा ही अब मेरी बिसात है।
गमों को छिपाने का ठिकाना बन गया,
हर कतरे में एक अलग बात है।
शायरी 3
पीने वालों की यहाँ भीड़ लगी है,
हर आँखों में एक प्यास जगी है।
जो दिल का दर्द छुपाना चाहता है,
वो हर शाम मैकदा में आ गया है।
शायरी 4
क्या खबर थी कि ऐसा भी दौर आएगा,
हर अश्क मैकदा में बिखर जाएगा।
जहाँ रूह को थोड़ी राहत मिलेगी,
वहीं दिल का दर्द निखर जाएगा।
शायरी 5
बज़्म-ए-शराब में तेरी यादें महकीं,
हर घूँट में तेरी सूरतें चमकीं।
ये मैकदा नहीं, ये तो जन्नत है मेरी,
जहाँ हर प्यास को मिलती है तसकीन।
शायरी 6
गमों का बोझ जब सँभाला न गया,
फिर मैकदा ही आख़िरी सहारा बना।
हर दर्द को घूँट-घूँट कर पी लिया,
ज़िंदगी का हर ज़ख्म हरा-भरा रहा।
शायरी 7
रिंदों की महफ़िल सजी है आज फिर,
हर चेहरा कहता है कोई दर्द गहरा।
इस मैकदा की हर बोतल में कहानी है,
जहाँ दिल की बातें होती हैं बेपरवाह।
शायरी 8
दुनिया की रस्मों से बेखबर होकर,
आ गए हैं हम मैकदा में जी भर कर।
यहाँ कोई शिकवा नहीं, कोई शिकायत नहीं,
बस ज़िंदगी है और जाम है भरकर।
शायरी 9
लबों पे हंसी, आँखों में नमी सी है,
मैकदा में भी कुछ तो कमी सी है।
शायद तेरी तस्वीर नहीं है यहाँ,
वरना हर शय में एक खुशी सी है।
शायरी 10
ये कैसा नशा है, कैसा खुमार है,
हर साँस में बस तेरा ही प्यार है।
मैकदा की हर शराब बेअसर सी लगे,
जब से आँखों में तेरे दीदार है।
शायरी 11
शाम ढली और दिल उदास हुआ,
फिर मैकदा का ही रास्ता पास हुआ।
जहाँ हर गम को भुला दिया जाता है,
और हर ज़ख्म को आराम दिया जाता है।
शायरी 12
जो बात ना कर पाए लबों से कभी,
वो मैकदा की खामोशी ने कह दी सभी।
हर घूँट में एक सच्चाई छिपी है,
जो दुनिया से हमेशा रही अजनबी।
शायरी 13
सितारों की महफ़िल में जैसे चाँद,
वैसे ही मैकदा में हम हैं आज।
जहाँ हर दर्द भुला दिया जाता है,
और हर रात को नया आयाम दिया जाता है।
शायरी 14
तेरे इश्क में जब से हुए हैं हम बेखुदी,
तब से मैकदा ही बन गया है ज़िंदगी।
हर कदम पे तेरी यादें साथ चलती हैं,
चाहे कहीं भी ले जाए ये राह-ए-दीवानगी।
शायरी 15
बोतलें ख़ाली हुई, रात भी ढल गई,
मगर मैकदा की रौनक ना कम हुई।
हर दिल में एक उम्मीद अभी बाकी है,
शायद कोई और रात यहाँ कटनी है।
शायरी 16
दुनिया के झूठे रिश्तों से दूर,
मैकदा में मिलता है सच्चा सुरूर।
जहाँ दिल को कोई नहीं आजमाता,
और हर दर्द को कोई नहीं पाता।