Aatma (आत्मा)

hindi shayari, हिंदी शायरी

रूहानी एहसास: आत्मा पर दिल छू लेने वाली शायरी

आत्मा का सफर

शरीर तो एक पिंजरा है, पर उड़ती फिरती है आत्मा,
जन्मों का ये सिलसिला, ना रुकती कभी आत्मा।

अनंत सत्य

ना जलती है ये अग्नि से, ना कटती तलवार से,
अमर है मेरी आत्मा, परे है हर विकार से।

प्रेम की पुकार

हर धड़कन में बजती है, प्रेम की धुन,
मिलन को तरसती है, मेरी बेचैन आत्मा।

रूह का आईना

चेहरे पर जो दिखता है, वो बस एक पर्दा है,
असली सच्चाई तो है, ये निर्मल आत्मा।

मुक्ति की चाह

बंधन ये माया का, कब तक सहूं,
स्वतंत्र होना चाहती है मेरी आत्मा।

शांति की खोज

जहाँ शांति मिले, वहीं मेरा ठिकाना है,
भटकती फिरती है मेरी विचलित आत्मा।

आँखों में चमक

तेरी आँखों में देखी है मैंने, एक चमक अनमोल,
कहीं ये तेरी ही तो नहीं, मेरी आत्मा का बोल।

ज्ञान की प्यास

ये देह नश्वर है, पर ज्ञान का सागर है गहरी,
सच्चाई की प्यासी है ये, मेरी अनमोल आत्मा।

अस्तित्व का रहस्य

कभी दिखती नहीं, पर हर पल है मौजूद,
कैसा ये रहस्य है, मेरी अमर आत्मा।

पुण्य का मार्ग

कर लो कुछ नेक कर्म, जीवन है अनमोल,
पुण्य के पथ पर चलेगी तभी, तुम्हारी आत्मा।

ईश्वर से मिलन

उस परवरदिगार से, मिलना है मुझे,
कब होगी पूरी ये चाह, मेरी रूहानी आत्मा।

प्रकाश की ओर

अंधेरों से निकलकर, प्रकाश में समा जाऊं,
इसी आस में जलती है, मेरी पावन आत्मा।

पवित्रता

ये शरीर है एक मंदिर, जिसमें बसी है ये शक्ति,
साफ़ रखना सदा इसे, ये ही है पवित्र आत्मा।

समय से परे

समय की कोई सीमा नहीं, इस पर कोई बंधन नहीं,
कालातीत है ये, मेरी शाश्वत आत्मा।

गहराई में

दुनिया की भीड़ में, खोया रहा मैं कब से,
अब झाँका है मैंने भीतर, जहाँ बसी है मेरी आत्मा।

नीरव शांति

बाहर का शोरगुल, मुझे अब भाता नहीं,
अंदर की शांति है, मेरी शांत आत्मा।

अकेलापन

तन्हा नहीं हूं मैं, तू है मेरे साथ,
हर पल महसूस होती है, मेरी सच्ची आत्मा।

सत्य की पुकार

झूठ के परदे कब तक, ढकेंगे इस सच को,
सदा पुकारती रहेगी, मेरी निर्भय आत्मा।

बिछोह का दर्द

जब छोड़ के जाएगा ये तन, तब कहाँ जाएगी,
एक नए सफ़र पर, निकल पड़ेगी ये आत्मा।

ईश्वर का अंश

तू ही तो है वो अंश, उस विराट का,
कण-कण में समाई है, मेरी दिव्‍य आत्मा।

कर्मों का फल

जो बोया है तूने, वही तो काटेगा,
कर्मों का हिसाब रखेगी, तेरी आत्मा।

मोक्ष की डगर

माया के जाल से, निकलना है कठिन,
मोक्ष की डगर पे चलती है, मेरी मुक्त आत्मा।

अमर कहानी

सदियों से चलती आ रही, एक अमर कहानी,
हर जीव में बसती है, वही अमर आत्मा।

सच्चा सुख

ये दुनिया के सुख तो, सब क्षणिक हैं,
सच्चा सुख तो है, जब मिले तेरी आत्मा।

ध्यान में लीन

ध्यान में जब लीन हो, ये मन मेरा,
तब प्रकट होती है, मेरी शांत आत्मा।

प्रेम का स्रोत

प्रेम का ये झरना, बहता रहे सदा,
इसी से तृप्त होती है, मेरी प्रेममय आत्मा।

मृत्यु का भय

मृत्यु का भय तो, इस शरीर को है,
अमर है जो, वो है ये निडर आत्मा।