अना (Ego): दिल छू लेने वाली शायरी
Shayari 1
क्या मिली दिल को, यह कैसी सज़ा,
जब भी मिली, रिश्तों में बस अना।
Shayari 2
तेरे मेरे दरमियां दीवार सी खड़ी है,
कमबख्त ये अना कितनी बड़ी है।
Shayari 3
मोहब्बतें तो बहुत की हमने मगर,
अना ने कभी झुकने न दिया उम्र भर।
Shayari 4
टूटे रिश्ते बिखरते ख़्वाब,
सब इस अना के ही हैं अज़ाब।
Shayari 5
माफ़ कर देना ऐ दोस्त गर कुछ भूल हो जाए,
मगर ये अना है कि झुकने को न आए।
Shayari 6
रिश्तों की डोर बड़ी नाज़ुक होती है,
अना की एक चोट से टूट जाती है।
Shayari 7
क्यों समझते नहीं लोग ये राज़,
बर्बाद कर देती है ये अना की आवाज़।
Shayari 8
अगर हो जाए थोड़ी सी भी कमी,
तो अना सह नहीं सकती ये ज़मीं।
Shayari 9
रिश्तों को आज़माते रहे हम बार-बार,
हर बार सामने खड़ी थी अना की दीवार।
Shayari 10
जुबां पर खामोशी, दिल में है शोर,
अना की वजह से टूट रही हर डोर।
Shayari 11
ग़ुरूर का पर्दा जब आँखों पर छाता है,
तब इंसानियत पर अना का राज़ आता है।
Shayari 12
प्यार की राहों में ये काँटा क्यों है,
हर मोड़ पर ये अना क्यों है?
Shayari 13
कोई कहता है कि वो कम नहीं,
ज़िंदगी में बस यही तो है अना का ग़म।
Shayari 14
बात छोटी सी थी, तूने बड़ा कर दिया,
तेरी अना ने हमें जुदा कर दिया।
Shayari 15
ख़ामोशियाँ अक्सर बहुत कुछ कहती हैं,
जब लफ्ज़ों पर अना की पहरा रहती है।
Shayari 16
अंजाम-ए-मोहब्बत का ये कैसा सफ़र,
दोनों की अना को नहीं है कोई खबर।
Shayari 17
झुकने को तैयार नहीं मेरा वजूद,
शायद इस अना में ही है मेरा सुजूद।
Shayari 18
क़ुर्बतें दूरियों में बदलती गईं,
जब से हमारी अना रंग लाती गईं।
Shayari 19
तेरी ख़ुशी में मेरी अना हार जाए,
यही सोचकर दिल अक्सर जलता जाए।
Shayari 20
जब दिल में हो प्यार, अना को हटाना होगा,
तभी तो रिश्तों को फिर से सँवारना होगा।
Shayari 21
इंसानियत का दामन छोड़ देती है,
जब हद से गुज़र जाए ये अना।
Shayari 22
तेरी ही गली में हम थे बरसों से,
बस अना ने रोक रखा था दरबसों से।
Shayari 23
कभी सोचकर तो देख, क्या खोया तूने,
बस अपनी इस ज़ालिम अना के लिए।
Shayari 24
प्यार की ख़ातिर अगर झुक भी जाएँ,
क्या होता है गर अना को मिटा जाएँ।
Shayari 25
दिलों के बीच फासले बढ़ा देती है,
ये बेमतलब की अना।
Shayari 26
कब तक यूँ ही रूठे रहेंगे,
इस अना की क़ैद में जीते रहेंगे।
Shayari 27
अगर मिल जाए कभी फुर्सत से,
सोचना, क्या बचा तेरी अना के बाद।
Shayari 28
हर बहस हर लड़ाई की जड़ में,
छिपी है कहीं न कहीं ये अना की हठ।
Shayari 29
रिश्तों को यूँ बेमौत मरते देखा है,
जब से हर दिल में अना का बसेरा देखा है।
Shayari 30
चलो आज छोड़ दें ये जंग-ए-अना,
और फिर से प्यार की दुनिया बसा लें ज़रा।
✨ दिल की गहराई से निकले अनमोल बोल... ✨