बंदगी: दिल से निकली इबादत की गूँज
Shayari 1
तेरी यादों में खोकर, हर पल ये दिल पुकारे,
सच्ची है मेरी बंदगी, हर साँस में तेरा नाम है प्यारे।
Shayari 2
झुक जाए सर मेरा, तेरे दर पे हमेशा ही,
यही तो मेरी बंदगी है, यही मेरी बंदगी।
Shayari 3
दिल की गहराइयों से निकली हर दुआ,
तेरी ही तो बंदगी है, मेरी हर साँस में खुदा।
Shayari 4
हर लफ्ज़ में तेरी इबादत का सुरूर है,
मेरी हर बंदगी में बस तेरा ही नूर है।
Shayari 5
अंजाम-ए-इश्क चाहे जो भी हो, परवाह नहीं,
तेरी बंदगी में जीना ही मेरा हसीन ख्याब सही।
Shayari 6
दुनिया की फ़िक्र से दूर, दिल को करार मिला,
जब से तेरी बंदगी का मैंने इकरार किया।
Shayari 7
हर सुबह-ओ-शाम तेरी यादों में गुम हूँ,
मेरी हर बंदगी में बस तेरा ही जुनून है।
Shayari 8
कहाँ ढूँढें तुझे, तू तो रूह में बसा है,
मेरी हर बंदगी में तेरा ही तो पता है।
Shayari 9
जहाँ भी देखूँ, तेरा ही अक्स नज़र आता है,
यह कैसी बंदगी है, जो हर पल बहकाता है।
Shayari 10
दीवाने हैं हम तेरे, तेरे नाम के पुजारी,
तेरी बंदगी में गुज़र जाए, ये उम्र हमारी।
Shayari 11
नमाज़ें पढ़ ली, मस्जिद भी देख ली,
सच्ची बंदगी तो दिल से निकली, मैंने सीख ली।
Shayari 12
रूह का हर कतरा तेरी चाहत में डूबा है,
ऐ खुदा, मेरी हर बंदगी तुझसे ही जुड़ा है।
Shayari 13
ये दिल क्या चीज़ है, ये जान भी लुटा देंगे,
तेरी पावन बंदगी में, हम खुद को मिटा देंगे।
Shayari 14
फकीरी भी कबूल है, अगर तू साथ हो,
तेरी बंदगी ही मेरी हर रात की प्रभात हो।
Shayari 15
इश्क की राह में चलना आसान नहीं होता,
पर तेरी बंदगी में तो हर पल सुकून होता।
Shayari 16
हर धड़कन में तेरा नाम गूंजता है,
मेरी बंदगी का ये अजब अंदाज़ है।
Shayari 17
वो नज़ारा भी क्या खूब होगा,
जब तेरी बंदगी में ये दिल महफ़ूज़ होगा।
Shayari 18
हर खुशी, हर गम में, तू ही मेरी पनाह है,
तेरी बंदगी ही मेरी इकलौती राह है।
Shayari 19
ना दौलत चाहिए, ना शोहरत का जुनून,
बस तेरी बंदगी में मिलता है सच्चा सुकून।
Shayari 20
तेरे प्यार की आग में जलकर, मैं राख हो जाऊँ,
तेरी बंदगी में ऐसे खो जाऊँ कि बेबाक हो जाऊँ।
Shayari 21
हर इबादत, हर दुआ, बस तेरे नाम की है,
मेरी सारी बंदगी, ए मेरे मालिक, तेरे ही काम की है।
Shayari 22
ये दुनिया एक धोखा है, तू ही मेरा यकीन है,
मेरी बंदगी में छुपा, मेरा हर हसीन दीन है।
Shayari 23
जला दे मेरी हस्ती को, अपनी लौ से,
तेरी बंदगी की रौशनी में, मुझे रोशन कर दे।
Shayari 24
कोई क्या समझेगा, इस दिल की दास्तान,
तेरी बंदगी ही मेरी, सच्ची पहचान।
Random Posts
Most Popular
Tags
Recent Posts
Random Posts
Created By SoraTemplates | Distributed By Blogspot Templates