ज़िन्दगी के भरम और हकीकत: एक शायरी संग्रह
पहला भरम
दिल में बसा था इक गहरा भरम,
कि वो हमेशा मेरा रहेगा, ये था मेरा वहम।
टूटते रिश्ते
क्या खूब था वो रिश्ता, क्या खूब था वो प्यार,
निकला सब इक भरम, टूटा मेरा संसार।
सच का सामना
आँखों पर पर्दा था, देखा न सच कभी,
सच को झुठलाता रहा, यही था मेरा भरम सभी।
वफा का गुमान
कितने भरम पाले थे मैंने, तेरी वफादारी के,
एक पल में टूट गए, सारे वादे, सारी कसम।
जीवन का आधार
ये ज़िन्दगी की कशमकश, ये रौनकें सब बेकार,
एक भरम ही तो है, जीने का ये आधार।
झूठे एहसास
वो कहता रहा, है सच्चा प्यार, है सच्ची दोस्ती,
देर से समझे, ये सब उसका भरम और फरेब ही।
अहंकार का जाल
कुछ लोगों को रहता है अपने आप पर बड़ा भरम,
ये सत्ता, ये दौलत, सब है पल भर का सितम।
सपनों की दुनिया
सपनों की दुनिया में जीते रहे हम बेखबर,
जब आँखें खुलीं तो टूटा हर एक भरम।
उम्मीद का दामन
उम्मीद का दामन थामे, चले हम दूर तक,
जब हकीकत मिली, टूट गया हर भरम फकत।
दुनिया की रीत
इस दुनिया की है एक अजीब सी रीत,
हर कदम पर देती है ये भरम की भेंट।
सत्य की खोज
ढूँढता रहा मैं सत्य को यहाँ-वहाँ,
जब मिला, टूट गया हर एक भरम वहाँ।
खुदगर्जी का साया
खुदी का भरम पाले बैठा है इंसान,
क्या पता कब टूट जाए, ये उसका गुमान।
रिश्तों का जाल
ये रिश्तों के धागे, ये प्यार का भरम,
कमज़ोर थे, टूट गए, बढ़ गए मेरे ग़म।
सवेरा और अंधेरा
अंधेरे में जलती रही उम्मीद की शमा,
सुबह होते ही टूटा मेरा हर एक भरम।