प्रार्थना (Prarthana) - हृदय की पुकार
शायरी 1
जब रूह पुकारे रब को, दिल से निकले आवाज,
हर एक इबादत बन जाती है, वो सच्ची प्रार्थना की साज।
शायरी 2
अंधेरों में जब रौशनी की, आस लगे बेकरार,
लबों पर आ जाती है फिर, ये दिल की प्रार्थना हर बार।
शायरी 3
हर सुबह की पहली किरण, हर शाम का ढलता रंग,
समेटे है इसमें उम्मीदें, मेरी खामोश प्रार्थना का ढंग।
शायरी 4
सुकून मिलता है मुझको, जब झुकाऊँ अपना सर,
सारी चिंताएँ मिट जाती हैं, मेरी प्रार्थना में आकर।
शायरी 5
गमों की जब घटाएँ छाएँ, राहें हों सब अनजानी,
तब सहारा बन जाती है, ये मेरी प्रार्थना रूहानी।
शायरी 6
कभी खुद के लिए मांगी, कभी दूसरों के वास्ते,
खुदा तक पहुंच जाती है, ये प्रार्थना के रास्ते।
शायरी 7
टूटे हुए दिल को जोड़ती, बिखरी हुई आसों को संवारती,
हर मुश्किल को आसान करती, ये मेरी प्रार्थना प्यारी।
शायरी 8
आंसुओं से भरी आंखें, जब तकती हैं आसमां को,
एक नई उम्मीद जगाती है, हर एक प्रार्थना रब को।
शायरी 9
दुआओं में मेरी बसी है, तेरी खुशियों की चाह,
हर पल करता रहूँ मैं, ये ही मेरी सच्ची प्रार्थना की राह।
शायरी 10
संसार के शोरगुल में, मन जब हो जाए विचलित,
शांति का दीप जलाती है, मेरी ये प्रार्थना निश्चित।
शायरी 11
कर्मों से पहले है ये, हर कदम से पहले,
सच्चे मन से की गई, हर प्रार्थना से डरते भले।
शायरी 12
शक्ति दे, भक्ति दे, दे मुझे ये ज्ञान,
हर घड़ी में तुझसे करूँ, बस यही प्रार्थना महान।
शायरी 13
जब थक हार कर बैठूं, कोई रास्ता ना सूझे,
तेरा नाम ले लेता हूँ, और प्रार्थना में सब बुझे।
शायरी 14
माफी हो गुनाहों की, नेकी का मिले आधार,
हर इंसान की है ये, दिल से निकली प्रार्थना सार।
शायरी 15
छोटे-छोटे ख्वाबों को, बड़ी उड़ान देती है,
हर एक प्रार्थना ही तो, मंजिल का निशान देती है।
शायari 16
रिश्तों की डोर को बांधे, अपनों को करीब लाए,
प्यार भरी हर प्रार्थना, जीवन में खुशियाँ लाए।
शायरी 17
संकटों से उबारे, विपदाओं को हर ले,
विश्वास से भरी प्रार्थना, हर मुश्किल को टर ले।
शायरी 18
हे ईश्वर! ये ही अरदास, रहे मेरा मन निर्मल,
तेरी शरण में रहूँ सदा, मेरी यही प्रार्थना केवल।
शायरी 19
Reviewed by Editor
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सितंबर 25, 2026
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