क़िस्मत (Qismat) की गहराइयाँ: शायरी का संग्रह
1. क़िस्मत का खेल
नज़रें मिलाईं तो मालूम हुआ, हर शख्स का अपना एक फ़साना है,
कोई हँस रहा है, कोई रो रहा है, ये सब तो बस क़िस्मत का तराना है।
2. रास्तों का मोड़
बदलते रहे रास्ते, बदलती रही मंज़िलें हमारी,
हम क्या जानें, ये किस मोड़ पर ले आई हमें क़िस्मत हमारी।
3. तकदीर का लिखा
बहुत आज़माया हमें ज़माने की ठोकनों ने, मगर डटे रहे,
क्योंकि हर शख्स जानता है, जो लिखा है क़िस्मत में, वो ही मिलते रहे।
4. उम्मीदों का दामन
थामे रखा है उम्मीदों का दामन, चाहे कितनी भी हो रात काली,
एक दिन तो बदलेगी ये क़िस्मत, आएगी रोशनी की लाली।
5. बेवफा दुनिया
ये दुनिया बेवफा है, यहाँ कौन किसका साथ देता है,
जो होना है वही होता है, क़िस्मत का ही खेल ये होता है।
6. शिकवा नहीं
न कोई शिकवा है, न कोई शिकायत है अब,
जो लिखा है क़िस्मत में, वही हमें मंज़ूर है सब।
7. संघर्षों का सफ़र
संघर्षों से भरा है ये जीवन का सफ़र,
क्या पता किस मोड़ पर खड़ी है हमारी क़िस्मत, न कोई ख़बर।
8. बदलती हवाएँ
कभी खुशी, कभी गम, यही है दुनिया का दस्तूर,
हवाएँ भी बदलती हैं, जब बदलती है क़िस्मत का नूर।
9. खुदा की मर्ज़ी
हम तो बस एक मोहरा हैं इस दुनिया के खेल में,
सारी डोर तो खुदा के हाथ में है, और उसकी क़िस्मत के मेल में।
10. आँसुओं का दरिया
कभी आँसुओं का दरिया, कभी खुशियों की लहर,
यही तो है क़िस्मत का इम्तिहान, हर सुबह और हर दोपहर।
11. अंधेरों में रौशनी
जब घिर जाते हैं अंधेरे, और दिखती नहीं कोई रौशनी,
तब भी उम्मीद रहती है, शायद बदल जाए क़िस्मत की कहानी।
12. सब्र का फल
सब्र का फल मीठा होता है, ये कहावत है पुरानी,
काश हमारी क़िस्मत में भी हो, थोड़ी सी मेहरबानी।
13. लकीरों का खेल
हाथों की लकीरों में क्या कुछ लिखा है, कौन जाने,
क्या पता कब बदल जाए, ये क़िस्मत के बहाने।
14. वक्त का सितम
वक्त का सितम भी क्या खूब है, हर पल बदल जाता है,
पर अफसोस, कभी-कभी क़िस्मत का लिखा नहीं बदल पाता है।
15. बेबस इंसान
बेबस है इंसान, चाह कर भी कुछ कर नहीं पाता,
जब क़िस्मत ही रूठी हो, तो क्या कोई साथी बन पाता?
16. दुआओं का असर
माना क़िस्मत में नहीं लिखा कुछ भी मेरे हक में,
पर दुआओं का असर भी तो है, शायद बदल जाए ये कर्म में।
17. ख्वाबों की ताबीर
ख्वाबों की ताबीर तो हर कोई चाहता है अपनी,
पर क़िस्मत कहाँ सुनती है, वो तो लिखती है अपनी धुन अपनी।
18. अकेलापन
अकेलापन ही साथी है, और तन्हाई है दोस्त हमारी,
कुछ ऐसा ही लिखा है क़िस्मत में, ये है ज़िंदगी की कहानी।
19. हार और जीत
हार और जीत तो ज़िंदगी का एक हिस्सा है,
पर कभी-कभी क़िस्मत ही लिख देती है, ये सारा किस्सा है।
20. अनजान राहे
अनजान राहों पर चले हैं, मंज़िल का पता नहीं,
जाने कब रुकेगी ये क़िस्मत, न कोई आता न कोई कहीं।
21. बदलता दौर
दौर बदलता है, ज़माना बदलता है, हर चीज़ बदल जाती है,
पर एक क़िस्मत है जो, बस अपनी राह चलती जाती है।
22. मीठी यादें
कुछ मीठी यादें, कुछ कड़वे पल छोड़ जाती है ज़िंदगी,
क्या पता किस क़िस्मत ने लिखी है, ये सारी बंदगी।
23. दिल की चाह
दिल की चाहत थी कुछ और, मगर मिल गया कुछ और,
शायद मेरी क़िस्मत ने ही लिखा था, ये अजब सा दौर।
24. गम का साया
गम का साया है हर पल, खुशियाँ मुझसे रूठी हैं,
क्या करूँ, जब मेरी क़िस्मत की लकीरें ही टूटी हैं।
25. परदेस का आलम
परदेस का आलम है, न यार है न कोई हमदम,
जाने कहाँ ले आई ये
Reviewed by Editor
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सितंबर 28, 2026
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