यतीम: दिल से निकली दर्दभरी शायरी
दुनिया की भीड़ में, वो अकेला खड़ा है,
हर राह उसकी, एक वीरान सफर है।
न कोई सहारा, न कोई अपनापन,
जीवन की दौड़ में, वो एक यतीम बच्चा है।
ख्वाबों में भी अक्सर, वो माँ की गोद ढूँढता है,
हर रात तारों से, अपने बाप को पूछता है।
अधूरी कहानियों का, वो एक जीता-जागता पन्ना,
हर साँस उसकी, एक दर्द भरी है दास्तां।
हाँ, वो एक यतीम है, जिसकी रूह भी प्यासी है।
खुशियों की आहट पर, अक्सर वो सहम जाता है,
शायद किसी ने सिखाया नहीं, कैसे मुस्कुराते हैं।
टूटे खिलौनों सा, पड़ा है किसी कोने में,
दिल उसका यतीम, दुनिया की रंगीनी से दूर है।
हर ईद, हर दिवाली, उसकी आँखों में नमी है,
जश्न के माहौल में भी, वो अक्सर गुमनामी में है।
कौन बाँटेगा मिठाइयाँ, कौन पहनाएगा नए कपड़े,
त्योहारों की खुशी से, बेगाना है वो यतीम।
स्कूल की राहें भी, उसे तन्हा लगती हैं,
दोस्तों के झुंड में, उसकी जगह खाली रहती है।
किताबों के पन्नों में, वो अपनी किस्मत ढूँढता है,
ज्ञान की तलाश में भी, वो एक अकेला यतीम है।
कभी किसी की बात से, दिल उसका टूट जाता है,
कभी किसी के ताने से, वो और सिमट जाता है।
कौन सिखाएगा उसे, दुनिया से लड़ना भला,
हर मुश्किल के सामने, वो मासूम यतीम।
रात की खामोशी में, अक्सर वो रोता है चुपचाप,
कोई पूछने वाला नहीं, क्या है उसके दिल का हिसाब।
चाँद तारे भी उसकी, उदासी को पहचानते हैं,
तन्हाई का साथी, ये बेबस यतीम।
अल्लाह की रहमतों का, आसरा है उसे बस,
हर दुआ में माँ-बाप को, याद करता है वो कस।
जन्नत में मिलेंगे, इस उम्मीद पे जीता है,
धैर्य और सब्र का, ये जीता-जागता यतीम।
बड़ी इमारतों के नीचे, छोटा सा घर है उसका,
टूटे सपनों से बुना, अधूरा सा जहाँ है उसका।
महलों की चमक से, उसकी आँखें अंजान हैं,
फर्श पर सोता, वो बदनसीब यतीम।
भूख की आग में भी, वो सब्र करना जानता है,
छोटे से टुकड़े में भी, वो शुक्र अदा करता है।
दुनिया की नेमतों से, भले ही वो महरूम हो,
ईमान की दौलत का, धनी है वो यतीम।
खेल के मैदानों में, उसे कोई बुलाता नहीं,
दौड़ते बच्चों संग, वो कभी मुस्कुराता नहीं।
दूर खड़ा देखता है, उन खुशियों के लम्हों को,
साए सा भटकता, अकेला यतीम।
माँ की ममता का, एहसास उसे याद नहीं,
बाप की उँगली पकड़ना, वो पल नसीब नहीं।
अधूरी यादों का, एक धुंधला सा चित्र है,
प्यार के बिना बड़ा, हुआ ये यतीम।
फटे कपड़ों में भी, उसकी आँखों में चमक है,
बड़े होकर कुछ करने की, उसके दिल में कसक है।
किस्मत की लकीरों को, खुद लिखने को है तैयार,
हिम्मत और हौसले से भरा, ये यतीम।
जब किसी की गोद में, बच्चा सोता देखता है,
तो उसका दिल भी, एक पल को ठहर जाता है।
काश कोई होता, जो उसे भी पुचकारता,
प्यार को तरसता, दिल का यतीम।
बारिश की बूँदों में भी, वो आंसू छुपा लेता है,
कोई
Reviewed by Editor
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सितंबर 14, 2026
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