फ़िक्र की गहराइयाँ: दिल को छू लेने वाली शायरी
फ़िक्र-ए-ज़िंदगी
हर कदम पर है एक नई आज़माइश,
कम नहीं होती ये फ़िक्र-ए-दुनिया की आजमाइश।
यादों की फ़िक्र
गुज़री बातें कहाँ अब भूली जाती हैं,
तेरी यादों की फ़िक्र हर पल सताती है।
दिल की फ़िक्र
वो चुप रहें पर दिल में शोर होता है,
उनकी हर छोटी फ़िक्र से मेरा दिल रोता है।
बेवजह फ़िक्र
जिसे मालूम ही नहीं मेरी चाहतें क्या हैं,
क्यूँ बेवजह उसकी फ़िक्र में रातें जागता हूँ मैं।
इश्क़ और फ़िक्र
इश्क़ में कहाँ फ़िक्र होती है दुनिया की,
जब दिल में हो बस एक शख़्स की जुस्तजू।
तेरी फ़िक्र
तेरी एक मुस्कान पे लुटा दूँ मैं जहाँ सारा,
बस तू खुश रहे, इतनी सी है मेरी फ़िक्र प्यारा।
रात की फ़िक्र
रात भर उसकी यादों में उलझा रहता हूँ,
सुबह तक उसकी फ़िक्र में सिमटा रहता हूँ।
अधूरी फ़िक्र
कुछ फ़िक्र ऐसी हैं जो पूरी होती नहीं,
कुछ बातें ऐसी हैं जो कभी कही जाती नहीं।
खुशी और फ़िक्र
खुशी की लहरें भी फ़िक्र लिए आती हैं,
कहीं ये पल भी छिन न जाएँ, ये डराती हैं।
किसकी फ़िक्र
सब कहते हैं बेफ़िक्र होकर जियो तुम,
पर किसकी फ़िक्र छोडूँ, ये बता दो तुम।
लबों पर फ़िक्र
लबों पर हंसी है, पर दिल में फ़िक्र का डेरा है,
कैसे कह दूँ कि सब ठीक है, जब अंदर सब बिखरा है।
सुकून और फ़िक्र
सुकून की तलाश में निकली थी मेरी रूह,
पर हर मोड़ पर मिली फ़िक्र की एक नई बदबू।
तेरी हंसी की फ़िक्र
तेरी हंसी में भी एक दर्द छुपा दिखता है,
इस फ़िक्र में मेरा दिल भी तेरे साथ सिसकता है।
बेनाम फ़िक्र
नाम क्या दूँ इस अनजानी फ़िक्र को,
जो हर पल मेरे साथ चलती है, हर डगर को।
समय की फ़िक्र
समय के साथ सब बदल जाता है, कहते हैं,
पर कुछ फ़िक्र ऐसी हैं जो साथ ही रहते हैं।
कल की फ़िक्र
आज को जी ले ऐ दिल, कल की फ़िक्र क्यों करता है,
जो होगा देखा जाएगा, तू बस जी ले, क्यों डरता है।
सच्ची फ़िक्र
सच्ची फ़िक्र वो होती है जो बिन कहे समझ जाए,
आँखों में छुपे दर्द को भी जो बिना आवाज़ के जान जाए।
अकेलेपन की फ़िक्र
भीड़ में भी अक्सर अकेला सा महसूस होता है,
ये अकेलेपन की फ़िक्र हर साँस में घुलता है।
ख्वाबों की फ़िक्र
ख्वाबों की दुनिया में खोया रहता हूँ,
उनकी हकीकत की फ़िक्र में जागा रहता हूँ।
तेरी नाराज़गी की फ़िक्र
तेरी नाराज़गी की फ़िक्र में हम खुद से रूठ जाते हैं,
तेरे मुस्कुराने की चाह में सब कुछ भूल जाते हैं।
रूह की फ़िक्र
जिस्म तो फ़ानी है, रूह अमर है कहते हैं,
पर रूह की फ़िक्र में ही हम जीते मरते हैं।
अनदेखी फ़िक्र
कुछ फ़िक्र ऐसी हैं जो नज़र आती नहीं,
पर दिल को हर पल वो खाये जाती हैं।
मौसम की फ़िक्र
मौसम बदलता है तो फ़िक्र होती है तेरी,
कहीं ठंड या गर्मी तुझे लग न जाए मेरी।
मुस्कान की फ़िक्र
तेरी मुस्कान की फ़िक्र में हर पल डूबा रहता हूँ,
कहीं कोई गम तुझे छू न ले, इस डर में रहता हूँ।
रास्ते की फ़िक्र
किस रास्ते पर है मंज़िल, ये फ़िक्र रहती है,
कहीं भटक न जाऊँ, ये बेचैनी रहती है।
रिश्तों की फ़िक्र
रिश्तों को निभाते-निभाते उम्र गुजर जाती है,
उनकी छोटी सी फ़िक्र में रातें कट जाती हैं।