दिलकश ख़याल: शायरी का जहान
पहला ख़याल
तेरा ख़याल मेरी रूह में उतर गया है,
जैसे चाँदनी रात को रोशन कर गया है।
दूसरा ख़याल
हर पल, हर लम्हा, बस तेरा ख़याल है,
ये ज़िंदगी भी अब तेरे नाम बेमिसाल है।
तीसरा ख़याल
जब भी आता है तेरा ख़याल आँखों में,
शाम ढल जाती है, चांदनी सी रातों में।
चौथा ख़याल
तेरे ख़याल से ही रोशन है दुनिया मेरी,
तू न हो तो हर शय अंधेरी, गुमसुम मेरी।
पांचवा ख़याल
कैसे बताऊँ कि कितना प्यारा है तेरा ख़याल,
ये तो बस दिल ही जानता है, इसका कमाल।
छठा ख़याल
नींद नहीं आती, रातों को जागा करता हूँ,
तेरे ख़याल में ही मैं खोया रहता हूँ।
सातवाँ ख़याल
क्या हसीं है ये, तेरा मुझमें समाया हुआ ख़याल,
जैसे खुशबू बिखरे गुलशन में, हर बार, हर साल।
आठवाँ ख़याल
तेरा ख़याल ही अब मेरी सबसे बड़ी दौलत है,
इसके सिवा मुझे और क्या ज़रूरत है।
नवाँ ख़याल
आँखों में अक्सर डूब जाते हैं तेरे ख़याल,
फिर ये दिल ढूंढता है तुझको, हर एक हाल।
दसवाँ ख़याल
कभी भूल न पाया हूँ, तेरा वो पहला ख़याल,
जिसने बदल दी मेरी दुनिया, और मेरा हाल।
ग्यारहवाँ ख़याल
सुबह-ओ-शाम रहता है बस तेरा ही ख़याल,
बिन तेरे हर साँस लगती है मुझे बेहाल।
बारहवाँ ख़याल
तेरा ख़याल लेकर ही तो मैं जीता हूँ,
इसी उम्मीद से हर दिन को मैं सीता हूँ।
तेरहवाँ ख़याल
कोई और ख़याल दिल में समाता नहीं है,
तेरे सिवा मुझे कुछ भाता नहीं है।
चौदहवाँ ख़याल
तेरा ख़याल तो खुशबू की तरह है,
जो हर पल मेरे साथ रहता है।
पंद्रहवाँ ख़याल
कब तक रखूँ तुझको, बस एक ख़याल बनाकर,
आ जाओ अब सामने, हकीकत बनकर।
सोलहवाँ ख़याल
तेरा ख़याल है, जो मुझे जगाए रखता है,
वरना ये दुनिया कब की सुलाए रखती है।
सत्रहवाँ ख़याल
कुछ ऐसा जादू है तेरे ख़याल में,
कि गुम हो जाते हैं सब, अपने ही हाल में।
अठारहवाँ ख़याल
तेरा ख़याल ही मेरा सुकून है अब तो,
इससे बेहतर कुछ और कहाँ है अब तो।
उन्नीसवाँ ख़याल
क्या खबर थी कि एक ख़याल इतना गहरा होगा,
जो हर सांस में मेरे साथ ठहरा होगा।
बीसवाँ ख़याल
तेरा ख़याल है तो दूरियाँ भी कम लगती हैं,
पास हो न हो, पर दिल में तुम रहती हो।
इक्कीसवाँ ख़याल
ये कैसा ख़याल है जो पीछा नहीं छोड़ता,
हर पल तेरी यादों से रिश्ता नहीं तोड़ता।
बाईसवाँ ख़याल