Malang (मलंग)

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रूह-ए-इश्क़: मलंग शायरियाँ

बेफिक्री का आलम

दुनिया की परवाह छोड़, वो मस्ती में डूबा है,
आशिक़ी का हर रंग, उसे अब रास आया, वो मलंग है।

इश्क़ का जुनून

दिल में है उसके बस एक ही धुन,
इश्क़ में होकर वो मलंग, जीता है हर इक पल।

खुद की तलाश

ढूंढता रहा ख़ुद को, हर गली हर डगर,
आखिर मिला वो खुद में, जब हुआ मलंग।

आज़ाद परिंदा

कैद नहीं अब उसे कोई सीमा, कोई बंधन,
आज़ाद परिंदा सा, उड़ता है वो मलंग।

दुनिया से बेखबर

दुनिया की रीतें, दुनिया के रिवाज़,
सब तोड़ कर, वो चला है मलंग।

मस्ती का ठिकाना

ना कोई मंज़िल, ना कोई ठिकाना,
जहाँ मिले मस्ती, वहीं है उसका मलंग आशियाना।

ज़िंदगी का सफर

हर पल को जीना, हर ग़म भुलाकर,
ज़िंदगी का सफ़र है उसका, मलंग होकर।

दीवानापन

आँखों में है उसके एक अजीब सी चमक,
दीवानेपन की हद है, वो मलंग की ललक।

रूह का सुकून

दुनियावी मोह से दूर, रूह को सुकून मिला,
जब से उसने ओढ़ा, ये मलंग लिबाज़।

फकीरी का अंदाज़

ना धन की चाह, ना दौलत का अभिमान,
फकीरी के अंदाज़ में, वो मलंग है महान।

धुएँ में घुला

ज़िंदगी के हर रंग को उसने है जिया,
धुएँ में घुल कर वो मलंग सा पिया।

मस्ती की धुन

हर साँस में है उसकी एक मस्ती की धुन,
जीवन को जीता है वो मलंग, बेगुन।

खुद में ही दुनिया

उसे नहीं चाहिए दुनिया का कोई शोर,
वो खुद में ही दुनिया, खुद में ही मलंग का ज़ोर।

रंगों का दीवाना

हर रंग में है उसके अपनी ही कहानी,
रंगों का दीवाना वो, ज़िंदगी का मलंग मानी।

सांसों में समाया

हर साँस में है उसकी आज़ादी का गीत,
रूह में समाया है वो मलंग का मीत।

दिल की फ़कीरी

दिल की फ़कीरी, आँखों में मस्ती,
यही है पहचान उसकी, मलंग की बस्ती।

हर गम से बेगाना

कोई गम नहीं उसे, कोई शिकवा नहीं,
हर हाल में खुश, वो मलंग है सही।

अपनी धुन में

दुनिया जो कहे, उसे क्या फिकर,
अपनी धुन में वो मलंग, चला बेख़बर।

खुदा का बंदा

ना मंदिर, ना मस्जिद, ना गुरुद्वारा,
खुदा का बंदा, वो मलंग है आवारा।

इश्क़ की आग

इश्क़ की आग में, वो जल रहा है,
ख़ुद को मलंग कह, अब बह रहा है।