रूहानी रहमत: दिल को छू लेने वाली शायरी
शायरी 1
खुदा की हम पर ये कैसी रहमत है,
कि हर मुश्किल में उसकी मोहब्बत है।
शायरी 2
जब भी पुकारा तुझे, तूने दी रहमत,
हर कदम पर मिली तेरी इनायत।
शायरी 3
ज़िंदगी में तेरी रहमत का साया है,
इसी से हर दर्द मेरा भरमाया है।
शायरी 4
नज़र भर देखने को मिली तेरी रहमत,
हर सुबह करती है नई जन्नत।
शायरी 5
हर फूल में उसकी रहमत का असर है,
हर सांस में उसका ही गुज़र है।
शायरी 6
तेरी रहमत से महका है मेरा आशियाना,
तू ही मेरा सहारा, तू ही ज़माना।
शायरी 7
जब उम्मीदें टूटीं, तेरी रहमत काम आई,
हर अंधेरे में बनके तू रोशनी आई।
शायरी 8
तेरी रहमत का ये आलम है मेरे दाता,
हर ग़म में भी मुस्कुराना सिखाता।
शायरी 9
कौन कहता है कि रहमत नहीं मिलती,
ढूंढने वाले को हर जगह दिखती।
शायरी 10
तेरी रहमत से ही है ये दुनिया कायम,
बिन तेरे सब अधूरा, बेनिशान।
शायरी 11
शुकराना है तेरा, तेरी रहमत का,
हर पल जो तूने दिया अपनी बरकत का।
शायरी 12
मेरी हर दुआ में शामिल तेरी रहमत,
कैसे करूँ बयां ये तेरी इनायत।
शायरी 13
तेरी रहमत है जो हम सांस लेते हैं,
तेरी रहमत से ही ज़िंदगी जीते हैं।
शायरी 14
दुनिया की हर खुशी में तेरी रहमत है,
हर आंसू में छिपी तेरी बरकत है।
शायरी 15
तेरी रहमत के बगैर हम कुछ भी नहीं,
तेरी रहमत से ही है हमारी हर खुशी।
शायरी 16
तेरी रहमत के दरिया में नहाते हैं हम,
तेरी मोहब्बत में जीते और गाते हैं हम।
शायरी 17
हर कण में बसी है तेरी रहमत की बूंद,
ये कायनात भी तेरी ही है एक झूंझ।
शायरी 18
तेरी रहमत से ही मिला ये जीवन अनमोल,
हर पल इसका करते हैं हम मोल।
शायरी 19
ग़मों की धूप में भी तेरी रहमत की छाँव,
तेरी पनाह में मिलता है हर गाँव।
शायरी 20
तेरी रहमत से रोशन हर सू है,