बरकत (Barkat) पर दिलकश शायरी का गुलदस्ता
शायरी 1
जब दिल में हो ख़ुदा का डर, तो मिलती है हर काम में बरकत,
सच्चाई से जो जिए ज़िन्दगी, उसे मिलती है रूहानी ताक़त।
शायरी 2
थोड़ा हो या बहुत, गर शुकराना हो दिल में,
हर चीज़ में अपने आप आ जाती है बरकत।
शायरी 3
नेक नियत और साफ इरादे, जहाँ होते हैं शामिल,
वहाँ हर कदम पर मिलती है रब की बरकत।
शायरी 4
रिश्तों में प्यार की गर्माहट, जब बनी रहती है,
तो घर आँगन में भी खूब आती है बरकत।
शायरी 5
खर्च करो जब नेक कामों में, बिना किसी लालच के,
देखना दौलत में तुम्हारी आएगी बेशुमार बरकत।
शायरी 6
छोटे काम में भी बड़ी होती है शान,
अगर साथ हो ऊपर वाले की बरकत।
शायरी 7
मेहनत की रोटी में ही तो है असली स्वाद,
उसी में छुपी होती है खुदा की बरकत का राज।
शायरी 8
जिस घर में बड़ों का आदर सम्मान होता है,
वहाँ खुशहाली के साथ बरकत का भी वास होता है।
शायरी 9
दिल को साफ रख, जुबान को मीठा कर,
तेरे हर अमल में खुद ब खुद आ जाएगी बरकत।
शायरी 10
जब सब्र की चादर ओढ़ ली जाती है,
तब हर मुसीबत में भी बरकत पाई जाती है।
शायरी 11
जिस घर में बच्चे खिलखिलाते हैं,
वहाँ खुशियाँ और बरकत साथ-साथ आती हैं।
शायरी 12
दुआओं में असर होता है, ये मान कर तो देख,
हर अरदास में मिलेगी तुझे खुदा की बरकत।
शायरी 13
जो बाँट के खाता है, उसका पेट हमेशा भरा रहता है,
खुदा उसकी कमाई में देता है ऐसी बरकत।
शायari 14
ईमानदारी से की गई हर कोशिश रंग लाती है,
उसमें रब की खास बरकत समा जाती है।
शायरी 15
जिस घर में होता है कुरान का पाठ,
वहाँ कभी नहीं होती खुशियों की बाट, आती है बरकत।
शायरी 16
अपने माता-पिता की सेवा में लगाओ दिल,
तुम्हारे हर काम में आएगी बरकत, मिलेगा सुकून।
शायरी 17
अल्लाह की रहमत जब बरसती है,
तो हर तरफ से बरकत ही बरकत दिखती है।
शायरी 18
जिसके दिल में है दूसरों के लिए मुहब्बत,
उसकी दौलत और शोहरत में होती है बरकत।
शायरी 19
कमाने से ज़्यादा बाँटने में है ख़ुशी,
इसी में छुपी है सच्ची बरकत की रोशनी।
शायरी 20
जो मेहनत से कमाता है, उसे मिलता है सिला,
उसकी कमाई में ख़ुदा डाल देता है बरकत का सिलसिला।
शायरी 21
पानी में भी बरकत आ जाती है, गर इबादत से हो,
दवा में भी शिफा होती है, गर नियत पाक से हो।
शायरी 22
जिसकी जुबान पर होता है ख़ुदा का नाम,
उसके काम में होती है, हमेशा बरकत तमाम।
शायरी 23
घर में रहे खुशहाली, दिल में रहे सुकून,
जब साथ हो रब की दी हुई बरकत का फितूर।
शायरी 24
छोटे से बीज से जैसे उगता है विशाल पेड़,
वैसे ही नेक नीयत से आती है जीवन में बरकत की भेंट।
शायरी 25
जब दिल से निकलते हैं, नेक काम और दुआएँ,
हर मुश्किल में साथ देती है खुदा की बरकत की छाँव।
शायरी 26
जिसके दामन में हो नेकी का साया,
उसकी हर ख्वाहिश पर आती है रब की बरकत का माया।
शायरी 27
रिज़्क़ में बरकत तभी आती है, जब दिल साफ होता है,
गुनाहों से दूर रहकर ही तो रब राज़ी होता है।
शायरी 28
जब सब मिलकर एक होते हैं, प्यार से रहते हैं,
तब घर में खुशियाँ और बरकत की धारा बहती है।