Paap (पाप)

hindi shayari, हिंदी शायरी, Paap (पाप)

पाप (Paap) पर दिल छू लेने वाली शायरियां

हर गुनाह का हिसाब होता है,
हर पाप का एक दिन आता है।

मन की शांति खो जाती है जब,
इंसान कर लेता है कोई पाप।

दुआओं से कटते नहीं हैं ये,
बड़े मुश्किल से धुलते हैं पाप।

इंसान की फितरत ही ऐसी है,
करता है फिर भी वो पाप।

नर्क की आग से बचोगे कैसे,
अगर न छोड़े ये पाप।

एक छोटे से पाप से शुरू होती है कहानी,
बड़े गुनाहों में बदल जाती है जिंदगानी।

पाप की दुनिया में खो न जाना कभी,
पुण्य की राह में चलना ही है सही।

आत्मा पर लगा धब्बा है पाप,
मिटाना है इसे, यही है ताप।

माफ़ी नहीं मिलती हर पाप को,
कुछ तो सहना ही पड़ता है ताप को।

झूठ की बुनियाद पर टिके हैं जो,
उनका हर कर्म बन जाता है पाप।

दूसरों का बुरा चाहने वाले,
अपने ही हिस्से में लिखते हैं पाप।

पाप का घड़ा एक दिन भरता है,
फिर कहाँ कोई उसे बचा पाता है।

कभी तो सोच उस रब की भी,
जिसके आगे झुकेगा हर पाप।

लालच और स्वार्थ की दुनिया में,
रोज़ जन्म लेता है नया पाप।

ईमान बेचकर जो कमाते हैं,
उनका धन भी तो है पाप।

छल कपट से हासिल की दौलत,
कभी सुख नहीं देती, यही है पाप।

हर एक आंसू बेजुबां का,
तेरे खाते में लिख देगा पाप।

कौन कहता है पाप छिप जाते हैं,
ये तो दिल पर निशान छोड़ जाते हैं।

माफ़ कर दे खुदा हर उस शख्स को,
जो अनजाने में करता है पाप।

धर्म का रास्ता छोड़ कर जो चले,
उनकी मंजिल हमेशा होती है पाप।

गरीबों को सताने वालों से पूछो,
कितना बड़ा होता है ये पाप।

दिल में नफरत लेकर जीने वाले,
हर पल कर रहे हैं एक नया पाप।

कर्मों का फल तो मिलना ही है,
चाहे किया हो कितना भी छोटा पाप।

ईर्ष्या और द्वेष से भरा मन,
हर सांस में करता है पाप।

दिखावे की दुनिया में जीते हैं जो,
असल में कर रहे हैं वो पाप।

ज़ुल्म सहना भी पाप है कहते हैं,
और ज़ुल्म करना तो महापाप है।

जब आंखें बंद होती हैं आखिर में,
तब दिखता है हर किया हुआ पाप।