"सवाब" की इबादत: रूहानी अल्फ़ाज़ में
नेकियाँ और सवाब की बारिश
हर लफ्ज़ जो अदा हो मुहब्बत से,
बन जाए वही हर दिल का सवाब है।
गर किसी की मदद में हाथ उठे, तो जानो,
ये दुनिया का सबसे बड़ा सवाब है।
ज़रूरतमंद की दुआओं में जो असर है,
उससे बढ़कर न कोई सवाब है, न कोई हुनर है।
इन्सानियत की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है,
यही जिंदगी का असली सवाब और कर्म है।
आँसुओं को मुस्कान में जो बदल दे,
वो ही पा लेता है बेशुमार सवाब।
खुदा की रहमत है, हर वो काम,
जिसमें छुपी है कोई नेक सवाब की शाम।
ज़ुबान से निकले प्यारे बोल,
रूह को देते हैं अनमोल सवाब।
माफ़ करना सिखाया जिसने हमें,
उसी की ज़िंदगी में सबसे ज्यादा सवाब।
गरीबों को खिलाना, प्यासों को पानी देना,
इससे बढ़कर और क्या हो सकता है सवाब लेना?
खुशी बाँटने वाले को कभी ग़म नहीं होता,
खुशी ही उसका सच्चा सवाब होता है।
रूह की पाकीज़गी
इल्म बाँटना भी एक इबादत है,
हर लफ्ज़ में छुपा उसका सवाब है।
सच बोलना हर हाल में, मेरे दोस्त,
यही तो है रूह का सबसे बड़ा सवाब।
इबादत की हर रस्म में जो दिल से हो,
खुदा देता है उसका पूरा सवाब।
छोटे बच्चे को प्यार से जो सहलाए,
उस हाथ में है खुदा का सच्चा सवाब।
माँ-बाप की खिदमत में जो गुजरे ज़िंदगी,
उससे बड़ा कहाँ कोई और सवाब होगा, ऐ बंदगी।
सबर और शुक्र का दामन जो थामे,
हर मुश्किल में पाए वो खुदा का सवाब।
किसी को राह दिखाना गुमराही से,
बेहिसाब मिल जाता है उसे सवाब।
अपने ज़मीर को साफ रखना हमेशा,
यही है हर ईमानदार का सवाब।
अगर किसी का बुरा न चाहो कभी,
तुम्हें खुद-ब-खुद मिल जाएगा सवाब।
बुजुर्गों का अदब जो करे दिल से,
हर कदम पर उसको मिले सवाब।
दुनिया-ओ-आख़िरत का नज़ारा
परेशानियों में जो दे दूसरों को दिलासा,
खुदा देता है उसे सवाब का तोहफा।
अपने हिस्से से जो दे दे किसी और को,
उसका हर जर्रा बन जाता है सवाब।
रहम दिल बनो, दूसरों पर मेहरबान रहो,
इसी में छिपा है दुनिया-ओ-आख़िरत का सवाब।
जो पौधा लगाए नेकी का अपने आँगन में,
हर पत्ते में पाए वो खुदा का सवाब।
इंसान का हर वो काम जो भलाई में हो,
उसी से मिलता है असली सवाब उसे।
दीन-दुनिया की हर अच्छी बात जो सिखलाए,
वो ही इंसान पाता है हर पल सवाब।
गलतियों पर पर्दा डालना सीखो तुम,
इसी में मिलता है बड़ा भारी सवाब।
बुरी बातों से जो खुद को रोके,
हर उस पल का उसे मिलता है सवाब।
नेकी का काम करके जो न इतराए,
खुदा उसकी हर नेकी का दे सवाब।
हर वो कदम जो मस्जिद की ओर उठे,
हर कदम पर लिखा जाए सवाब का किस्सा।
इंसानियत का नज़राना
इन्सानियत की खातिर जो जिए,
उसकी हर साँस में है सवाब।
किसी के चेहरे पर जो लाओ खुशी,
उसी में छुपा है तुम्हारा सवाब।
गरीबों का मसीहा बन कर जो आये,
उसे मिलता है हर पल सवाब।
जो दूसरों की मदद में अपना वक्त लगाए,
खुदा उसकी हर घड़ी को बनाए सवाब।
सच्चाई की राह पर जो डटा रहे,
उसे मिलता है बेमिसाल सवाब।
दिल से जो करे किसी के लिए दुआ,
उस दुआ में भी छिपा है सवाब।
नेकी का दरिया बहाने वाले कभी नहीं रुकते,
उन्हें हर पल मिलता है खुदा का सवाब।
अपने आस-पड़ोस का ख्याल जो रखे,
उसकी हर फ़िक्र में है खुदा का सवाब।
अमन और शांति की जो बात करे,
उसकी हर सोच में है खुदा का सवाब।
हर वो मुस्कुराहट जो किसी को दे आराम,
उसी में छुपा है ज़िंदगी का प्यारा सवाब।
"हर नेकी एक रोशनी है, हर सवाब एक दुआ। अपनी राह में नूर भरें और दूसरों के जीवन को जगमगाएं।" ✨💫
Reviewed by Editor
on
नवंबर 05, 2026
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