"सच (Sach)" पर दिल को छू लेने वाली शायरियां
शायरी 1
कितना मुश्किल है कहना, ये सच कभी-कभी,
छुपाए रहते हैं राज़, दिल में दबी-दबी।
शायरी 2
ज़ुबाँ पे आ न सके, वो बातें हैं कहीं,
मगर आँखों से छलकता, हमेशा सच वही।
शायरी 3
आइना है दिल का, जो सच दिखाता है,
भले ही दुनिया की नज़र में, ये छुप जाता है।
शायरी 4
रौशनी की तरह है सच, जो छुपता नहीं,
थोड़ी देर अंधेरा रहे, फिर भी मिटता नहीं।
शायरी 5
क़ीमत चुकाई है हमने, सच बोलने की,
दुनिया अक्सर नाराज़ होती है, दिल खोलने की।
शायरी 6
कड़वा होता है अक्सर, ये सच का ज़हर,
मगर देता है सुकून, मिटाकर हर कहर।
शायरी 7
कब तक भागोगे तुम, अपने ही सच से,
एक दिन तो सामना होगा, इस गहरे फँस से।
शायरी 8
रूह को तसल्ली देता है, सच का हर बयान,
भले ही पल भर को, लगे ये बड़ा परेशान।
शायरी 9
छलकता है आँखों से, कभी आवाज़ से,
कभी लफ्ज़ों में नहीं, तो कभी अंदाज़ से, ये सच।
शायरी 10
दुनिया की भीड़ में, खोया हुआ है सच,
पर ढूंढने वाले को, मिलता है ये हर वक्त।
शायरी 11
दोस्ती की बुनियाद भी है, ये सच की डोर,
इसी से जुड़े रहते हैं, हर खुशी और शोर।
शायरी 12
रिश्तों की गहराई में, छिपा होता है सच,
जो जान ले उसे, वही तो है सबसे अच्छा।
शायरी 13
डरते हैं लोग कहने से, जो दिल का सच है,
क्या पता ये दुनिया, क्यों इतनी बेरहम है।
शायरी 14
अक्सर तन्हा कर देता है, ये सच का रास्ता,
मगर अंत में मिलती है, मुक्ति की वास्ता।
शायरी 15
ज़मीर को जागृत करता है, सच की हर बात,
देता है ताकत जीने की, सुबह से लेकर रात।
शायरी 16
आज़ादी देता है हमें, सच का हर एक लफ्ज़,
ख़ौफ़ की दीवारों को तोड़ता है, पल भर में गर्ज़।
शायरी 17
भले ही देर से आए, पर आता है सच,
मिटा देता है झूठ को, जैसे बुझे हुए कच।
शायरी 18
इतिहास गवाह है, सच कभी हारा नहीं,
कितनी भी मुश्किल आए, ये कभी डरा नहीं।
शायरी 19
दिल में छुपा रखा है, ये कौन सा सच,
जो आँखों में दिखता है, पर ज़ुबाँ पर नहीं।
शायरी 20
बेबाक होकर कह दो, जो दिल में है सच,
क्या पता यही तुम्हें, दिला दे आज कुछ।