हक़ (Haq): हर लम्हे में एक एहसास
शिद्दत भरा हक़
तेरा हर लफ्ज़, तेरा हर अंदाज़, मेरा ही हक़ है।
जो तूने दिया है, वो बेहिचक मेरा हक़ है।
रिश्तों का हक़
रिश्तों में कभी हिसाब न करना,
मगर अपने हक़ का दावा ज़रूर करना।
वफ़ा पर हक़
दुनिया की दौलत भले ही मेरी न हो,
मगर तेरी वफ़ा पर मेरा पूरा हक़ है।
मोहब्बत का हक़
मोहब्बत का वो पहला अहसास,
सिर्फ़ तुम पर है मेरा हक़ खास।
नाराज़गी का हक़
नाराज़गी भी तुमसे, इल्तजा भी तुमसे,
ये सब कहने का मेरा हक़ है तुमसे।
हर लम्हे का हक़
हर खुशी, हर गम, हर लम्हा तेरा,
उन सब में शामिल होने का हक़ मेरा।
रूह का हक़
ख्वाबों में भी तुम मेरे, हकीकत में भी तुम,
तुम्हारी रूह पर है मेरा हक़, सिर्फ़ तुम।
अधिकार का साथ
मैंने खोया भी बहुत, पाया भी बहुत,
पर कभी नहीं छोड़ा अपने हक़ का साथ।
सच का हक़
सच कहना अगर हक़ है, तो ज़रूर कहो,
अन्याय के आगे कभी सर न झुकाओ।
खुशियों का हक़
किसी का हक़ मार कर, खुशियाँ नहीं मिलतीं,
रूह को चैन कहाँ, जब आत्मा जलती।
दोस्ती का हक़
दोस्ती का रिश्ता भी, बड़ा पवित्र होता है,
उसमें भी एक-दूसरे पर अपना हक़ होता है।
माँगा हुआ हक़
मैंने माँगा नहीं कभी, कुछ भी ज़माने से,
बस माँगा है अपना हक़, खुले दिल से।
आवाज़ का हक़
जहाँ इज्ज़त न मिले, वो महफ़िल छोड़ दो,
अपने हक़ के लिए, आवाज़ बुलंद करो।
परेशान हक़
ये कैसी दुनिया है, कैसी रीत है यहाँ,
जिसका हक़ है, वही क्यों है परेशान।
जीने का हक़
खुदा ने बख्शा है, जीने का ये हक़,
इसे यूं ही न गँवाओ, इसे समझो तुम तक।
हर एहसास पर हक़
आँसुओं पर भी मेरा हक़ है, मुस्कुराहट पर भी,
हर एहसास पर मेरा हक़ है, हर चाहत पर भी।
दिल में हक़
तू साथ है तो हर मुश्किल आसान है,
तेरे दिल में मेरा हक़, ये मेरा अरमान है।
प्यार का हक़
मोहब्बत में न मांगो कुछ, बस दे दो सब कुछ,
जो तुम्हारा हक़ है, वो खुद मिलेगा तुम्हें।
खामोशी में हक़
वो जो तुम्हारी खामोशी है, उसमें मेरा हक़ है,
वो जो तुम्हारी आँखों में है, वो भी मेरा हक़ है।
पुराना हक़
आज भी है मेरा हक़ उस पर, जो कभी मेरा था,
भले ही वक़्त ने बदल दिया हो सारा सिलसिला।
यादों का हक़
हर सुबह की किरण में, मेरा हक़ है तेरी यादों पर,
हर शाम की उदासी में, मेरा हक़ है तेरी बातों पर।
अपनी राह का हक़
अपनी ज़िदगी का फैसला खुद करना सीखो,
किसी को न दो ये हक़, अपनी राह चुनो।
ज़ुल्म के खिलाफ़ हक़
ज़ुल्म सहना भी गुनाह है, ज़ुल्म करना भी,
अपने हक़ के लिए लड़ो, यही है तुम्हारी करनी।
नाराज़गी का हक़
मैंने अपने हक़ की बात कही, तो खफा हो गए,
शायद उन्हें पसंद नहीं, मेरा बोलना कभी।
Reviewed by Editor
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नवंबर 02, 2026
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