जबीन (Forehead): दिल छू लेने वाली शायरी का संग्रह
तेरी तस्वीर लिए फिरता हूँ निगाहों में अपनी,
कबूल हो जाए इबादत मेरी, झुक जाए ये जबीन।
खुदा ने क्या हुस्न बख्शा है तेरी जबीन को,
हर नज़र ठहर जाती है इस नूर-ए-कमाल को।
सजदे में झुकाकर अपनी जबीन को,
मांगा है हर दुआ में बस तुझको।
क्या लिखा था किस्मत में मेरी जबीन पर,
कि तू मिला और हर ख्वाब हकीकत हो गया।
जब वो रुख से हटाते हैं आँचल अपनी जबीन से,
सारा आलम थम जाता है, इस हसीन नज़ारे से।
गम की लकीरें उभर आई हैं मेरी जबीन पर,
जाने कितने राज़ छुपाए हैं इस बेबस दिल पर।
तेरी जबीन की वो शिकन, वो मासूमियत,
दिल में बस गई है एक अजीब सी कैफियत।
हमने तो अपनी जबीन रगड़ दी तेरी चौखट पर,
अब तू ही बता, क्या इनाम है इस मोहब्बत पर?
सितारे भी शर्माते हैं तेरी जबीन के नूर से,
चाँद भी छिप जाता है इस हुस्न-ए-गुरूर से।
जब भी याद आती है तेरी वो हसीन सूरत,
मेरी जबीन पर सजदे का निशान उभर आता है।
ख्वाबों में भी ढूंढता हूँ वो जबीन का तिल,
जो मेरी हर सुबह को कर देता है रौशन दिल।
इबादत में जबीन झुकाना ही नहीं काफी,
दिल में भी तो रब की सच्ची मोहब्बत हो साकी।
क्या खूब लिखी है तक़दीर मेरी जबीन पर,
लिखा है मेरा नाम तेरे नाम के करीब पर।
नज़रों से नज़रे मिलीं, तो दिल भी थम गया,
तेरे हुस्न की चमक से जबीन पे पसीना जम गया।
तेरी जबीन पे ये बल क्यों हैं, ए जाने-जाँ,
क्या मैं कुछ कह गया जो तुझे नापसंद हुआ?
कभी तो झुकेगी तेरी जबीन मेरे प्यार के आगे,
ये मेरा यकीन है, ये मेरी चाहत के धागे।
वो जबीन जिस पर सजी थी कभी बिंदिया,
आज भी याद आती है उसकी वो मासूम अठखेलियां।
ज़माने भर के गम तेरी जबीन पे क्यों दिखते हैं,
काश मैं ले पाता सारे, जो तुझपे बीते हैं।
तेरे जबीन पे लिखा है मेरा नाम हमेशा,
चाहे मिट जाए दुनिया, ये मिटे ना कभी ऐसा।
हर सुबह देखती हूँ तेरी जबीन को चाँद की तरह,
और दुआ करती हूँ, ये नूर ना घटे कभी जरा।
तेरी जबीन पर बिखरी जुल्फें घटा सी हैं,
जो छुपा लेती हैं मेरे चाँद को पल भर में।
मेरे खुदा, मेरी जबीन को ऐसी इबादत दे,
कि हर सजदा मेरे महबूब की राह में निकले।
जब तू सजदे में झुकाता है अपनी जबीन को,
रब भी शर्माता है, देख कर तेरी बंदगी को।
कहाँ लिखूं अपनी दास्ताँ-ए-गम, कहाँ बताऊँ,
मेरी जबीन पे लिखी हैं सारी कहानियाँ, कैसे छुपाऊँ।
तेरी जबीन की शिकन में छुपे हैं राज़ गहरे,
क्या कहूं, क्या सुनूं, तेरे ये अंदाज़ सुनहरे।
उस जबीन पे नज़रे टिकी हैं मेरी,
जहाँ से निकलती है हर खुशी की किरण।
मेरी जबीन पर सजे हैं तेरे नाम के फूल,
इन्हें मुरझाने ना देना, बस इतनी सी है भूल।
तूने छुआ जो मेरी जबीन को मोहब्बत से,
हर दर्द मिट गया, हर खुशी मिली रहमत से।
वो जबीन जो कभी उदास नहीं होती थी,
आज उस पर क्यों ये गम की निशानियां हैं?
तेरी जबीन से उतरा नूर जब मेरे दिल में,
सारा जहाँ रोशन हुआ, हर अंधेरा घुल गया पल में।
झुकी हुई जबीन में लाखों सजदे छिपे हैं,
हर दुआ में तेरी खुशी, हर अरमान बसे हैं।
तेरी जबीन पर खिली मुस्कान का आलम,
भूल जाता हूँ मैं सारे दर्द और हर गम।
"शायरी की दुनिया में खो जाएं, हर अल्फाज़ में जज्बात पाएं।"
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Reviewed by Editor
on
सितंबर 26, 2026
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