मातम: दिल की गहराई से निकले एहसास
दर्द-ए-दिल की कुछ अनकही बातें
ज़िंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, कि हर खुशी से नाता तोड़ लिया,
अब तो बस आँखों में नमी है, दिल में हर पल तेरा मातम है।
रात भर जागते रहे तारे, गवाह थे मेरे दिल के हर सहारे,
टूटे जब ख्वाब सारे, छा गया हरसूँ मातम का नज़ारे।
क्या बताऊँ हाल-ए-दिल अपना, हर साँस में छुपा है दर्द का सपना,
तेरी यादों का साया है, मेरे वजूद में बस मातम छाया है।
रूह तड़पती है तेरी जुदाई में, हर लम्हा गुज़रता है तन्हाई में,
अब तो आलम ये है, कि हर ख़ुशी भी लगती है मातम में।
बर्बादी के मंज़र देख लो, मेरे दिल की उजाड़ ज़मीन पर,
जहाँ कभी बहारें थीं, वहाँ आज सिर्फ़ मातम है, हर डगर पर।
आँसुओं की स्याही से लिखा है फ़साना अपना,
हर लफ्ज़ में तेरी जुदाई का मातम है, जाना अपना।
जब से तुम गए हो ज़िंदगी से, हर रंग फीका पड़ गया,
खुशियों का दामन छूट गया, बस मातम ही संग रह गया।
हर रोज़ एक नया ज़ख्म मिलता है, इस टूटे हुए दिल को,
कैसे बताऊँ तुम्हें, मेरे अंदर हर पल मातम पलता है।
चुपचाप बैठा हूँ गमों की महफ़िल में,
क्योंकि मेरे दिल में तेरी यादों का मातम है हर पल में।
तेरी यादों के चिराग जलते हैं, दिल में मेरे,
हर रोशनी में छुपा है, एक गहरा मातम मेरे।
किसने कहा कि मैं खुश हूँ, मेरे चेहरे पर मुस्कान है,
ये तो मेरे दर्द को छुपाने का बहाना है, अंदर मातम-ए-जान है।
गमों की बारिश में भीगता रहा, तन्हा खड़ा मैं,
कब तक सहूँ इस दिल का मातम, ऐ खुदा मैं।
सन्नाटा है हर तरफ, दिल में उदासी छाई है,
तेरे बिन हर खुशी, मेरे लिए मातम लाई है।
मेरी आँखों की नमी में, एक कहानी है छुपी,
तेरी बेरुख़ी ने जो दी, वो मातम की निशानी है छुपी।
शाम-ओ-सहर बस यही दुआ करता हूँ,
कि कम हो मेरे दिल का मातम, और ना कुछ करता हूँ।
जो चला गया वो वापस ना आएगा, ये जानता हूँ,
फिर भी ये दिल तेरे लिए, हर पल मातम मनाता हूँ।
टूटा है दिल इस क़दर, कि आवाज़ भी ना निकली,
अंदर ही अंदर गूंजता रहा, ये खामोश मातम निकला।
खुशियों की बात न कर, मेरे दोस्त मेरे सामने,
मेरे दिल का हर कोना, मातम से सजा है ज़माने।
क्या ख़ाक जीएँगे हम अब तेरी जुदाई के बाद,
जब हर साँस में बसा है, तेरे ग़म का मातम याद।
तन्हाई के साये में, हर शाम ढल जाती है,
तेरी यादों के साथ, दिल में मातम पल जाती है।
मेरे अश्कों की कहानी, कोई समझ ना पाया,
अंदर ही अंदर मैंने, हर पल मातम मनाया।
मोहब्बत ने ऐसा रंग दिखाया, कि हम बर्बाद हो गए,
अब तो हर जश्न भी, हमारे लिए मातम हो गए।
दिए बुझ गए उम्मीदों के, अब रौशनी कहाँ,
मेरे दिल में है तेरा मातम, अब ज़िंदगी कहाँ।
हर धड़कन में तेरा नाम, हर साँस में तेरा ग़म,
ये कैसा सफ़र है, जहाँ बस मातम है हर कदम।
मेरी दुनिया वीरान हुई, जब तुम मुझसे बिछड़ गए,
खुशियाँ सब मुझसे रूठ गईं, बस मातम के पल मिल गए।
ये खामोशी नहीं, मेरे दिल का शोर है,
तेरी यादों का मातम, हर पल ज़ोर है।
कौन कहता है कि मरना आसान है,
ज़िंदा रहकर तेरा मातम सहना, कितना मुश्किल काम है।
गमों की चादर ओढ़ ली है, अब कहाँ से हँसी लाऊँ,
हर तरफ़ बस अंधेरा है, मैं किसका मातम मनाऊँ।
तेरी तस्वीर देख कर, आँखें नम हो जाती हैं,
मेरे दिल की हर धड़कन, मातम में खो जाती है।