नाला (Naala) पर बेमिसाल शायरी का संग्रह
शायरी 1:
शहर की गलियों में बहता वो नाला,
अपने साथ ले जाता है हर दुःख निराला।
शायरी 2:
दिल का बोझ था इतना भारी,
बन गया आँखों से बहता नाला।
शायरी 3:
प्रेम में जब भी कोई धोखा खाए,
अश्कों का नाला अक्सर बह जाए।
शायरी 4:
किस्मत का खेल देखो क्या खूब है,
कभी दरिया, कभी सूखा नाला है।
शायरी 5:
सूखी ज़मीन पर पानी की आस है,
बन जाए काश वो नाला, प्यास है।
शायरी 6:
महलों की शान में छिपकर बहता,
गरीब की बस्ती का वो गहरा नाला।
शायरी 7:
निशानी है वक़्त की, बदलता रहा,
कल नदी था, आज बस एक नाला रहा।
शायरी 8:
अकेलेपन का दर्द जब गहराया,
खामोशी में बहता एक नाला पाया।
शायरी 9:
यादों का समंदर उमड़ता रहा,
आँखों से बनकर वो नाला बहता रहा।
शायरी 10:
ये ज़िन्दगी का सफर भी अजीब है,
कहीं झील, कहीं सूखा नाला है।
शायरी 11:
जब टूट जाए उम्मीदों का किनारा,
बहता है फिर दिल का नाला सारा।
शायरी 12:
बारिश की बूंदों से मिलकर बहता,
मिट्टी की खुशबू से वो नाला सजता।
शायरी 13:
शिकायतों का सिलसिला जब बढ़ता है,
जुबाँ से निकलता है, हर नाला बहता है।
शायरी 14:
पत्थरों को चीर कर राह बनाता,
अपनी मंज़िल को पाता है नाला।
शायरी 15:
मोहब्बत की गहराई को कौन समझे,
कभी दरिया, कभी नाला बन के बहे।
शायरी 16:
गमों का साया जब भी छा जाता है,
आँखों से नाला बनकर छलक जाता है।
शायरी 17:
समय की धारा में बहते ये पल,
कहीं नाला, कहीं गहरी हलचल।
शायरी 18:
पतझड़ में सूखे पत्तों की तरह,
सूख गया मेरा ये जीवन नाला।
शायरी 19:
इश्क़ की राह में कांटे हज़ार,
दिल का हर आहट एक नाला बेशुमार।
शायरी 20:
उम्मीदों के दीप बुझ जाते हैं जब,
अंधेरे में बहता है नाला तब।
शायरी 21:
सपनों के शहर में गुम हो गया,
आँखों का वो बचपन का नाला।
शायरी 22:
कभी शांत, कभी उफ़नता बहता,
जीवन के रंगों सा है ये नाला।
शायरी 23:
जब भी कोई याद सताती है दिल को,
आँखों से बहता है वो गहरा नाला।
शायरी 24:
शिकायत नहीं किसी से अब हमको,
खुद ही नाला बन गए हैं हम तो।
शायरी 25:
तेरी यादों का नाला बहता रहा,
दिल में मेरे हमेशा रहता रहा।
शायरी 26:
शहर की रौनक में गुम हुआ,
खामोशी से बहता वो नाला।