Khamoshi (ख़ामोशी)
ख़ामोशी (Khamoshi): दिल की अनकही दास्तान तेरी यादों की गहरी रात में, लिपटी है मेरी ख़ामोशी हर बात में। लबों पर है कुछ अनकही दास्तान, आँखों में तैरती है दिल की ख़ामोशी की पहचान। जब जुबां से कुछ कह न पाए, तो मेरी ख़ामोशी ही सब कुछ बता जाए। शिकायतों का दौर अब खत्म हुआ, मेरी ख़ामोशी ने सारा शहर जीत लिया। इश्क के रास्ते में अक्सर, ख़ामोशी ही सबसे गहरी बात कह जाती है। रात की तन्हाई में चाँदनी सी, मेरी ख़ामोशी भी कितनी अफसोसनाक है। कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो बय...