Jafaa (जफ़ा)
दर्द-ए-दिल और जफ़ा (जफ़ा) के नग़मे ज़ख्मों की कहानी वो क्या जाने दर्द-ए-दिल मेरा, जो हर शाम आता है, हर सुबह एक नया ज़ख्म, ये तेरी जफ़ा (जफ़ा) दे जाता है। बेवफाई का आलम मेरी वफाओं का तूने, ये कैसा सिला दिया, हर पल जफ़ा (जफ़ा) करके, मुझको तन्हा किया। यादें और तन्हाई जब भी याद आती है तेरी, दिल में इक टीस उठती है, तेरी हर जफ़ा (जफ़ा) आज भी, मुझको बेचैन करती है। प्यार में ज़हर समझ न पाए थे हम कि, प्यार में ज़हर भी होता है, तेरी हर जफ़ा (जफ़ा) ने बताया, ये दिल क्यों रोता है। इश्क़ का अंजाम इश्क़ का अंजाम कुछ यूं हुआ, कि हम टूट कर बिखर गए, तेरी एक-एक जफ़ा (जफ़ा) न...